दिल्ली में राष्ट्रपति शासन को लेकर आतिशी की आशंका सही! कानूनी तौर पर कितना ठीक है AAP का ये आरोप?
आतिशी ने कहा कि AAP ने 2015 और 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में BJP को हराया है। इसलिए वे दिल्ली सरकार को गिराना चाहते हैं। लेकिन राष्ट्रपति शासन लगाना गैरकानूनी होगा, क्योंकि दिल्ली सरकार के पास बहुमत है। हमने इस साल 17 फरवरी को सदन में बहुमत परीक्षण पास कर लिया था
दिल्ली में राष्ट्रपति शासन को लेकर आतिशी की आशंका कितनी सही?
President Rule in Delhi: दिल्ली सरकार में मंत्री और आम आदम पार्टी (AAP) की नेता आतिशी (Atishi) ने शुक्रवार को ये आरोप लगाया है कि केंद्र की BJP सरकार अब राजधानी में राष्ट्रपति शासन (President Rule) लगा सकती है। उन्होंने इसके पीछे कई ऐसे संकेतों का हवाला दिया है, जिसे देखकर AAP नेता को ये आशंका है कि दिल्ली में उनकी सरकार हटा कर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की गिरफ्तारी उनकी सरकार को गिराने की एक राजनीतिक साजिश है।
उन्होंने कहा, "हमें हमारे विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा, लेकिन दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाना गैरकानूनी और लोगों के जनादेश के खिलाफ होगा।"
क्या है आतिशी की आशंका?
AAP नेता ने अपने आरोप के पीछे ऐसे कई संकेतों का जिक्र किया, जिससे उन्हें लगता है कि केंद्र राजधानी में राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जो इस आशंका की ओर इशारा करती हैं। मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के किसी वरिष्ठ अधिकारी को दिल्ली में तैनात नहीं किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया, "विभागों में पद खाली पड़े हैं, लेकिन कोई तैनाती नहीं हुई है। नौकरशाहों ने आदर्श आचार संहिता का हवाला देते हुए मंत्रियों की तरफ से बुलाई जाने वाली बैठकों में आना बंद कर दिया है। उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के कामकाज को लेकर गृह मंत्रालय को पत्र लिख रहे हैं।"
राज्यपाल कर सकते हैं राष्ट्रपति शासन की सिफारिश
दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की आशंका पर NALSAR नेशलन लॉ यूनिवर्सिटी के पूर्व VC और कानून के जानकार फैजान मुस्तफा का कहना है कि अगर उपराज्यपाल राष्ट्रपति को ये सिफारिश करते हैं कि मुख्यमंत्री काफी दिनों से जेल में हैं और 'संवैधानिक व्यवस्था चरमरा गई है', तो ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार ऐसा कुछ कदम उठा सकती है, उसके पास अधिकारी होगा।
फैजान मुस्तफा का इशारा संविधान की धारा 239 AB की तरफ था, जिसके तहत LG "संवैधानिक मशीनरी के टूटने" का हवाला देकर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। उपराज्यपाल धारा 239 AA के तहत सरकार को बर्खास्त करने के लिए भी यही कारण बता सकते हैं।
हालांकि, उन्होंने इसके राजनीतिक पहलू पर भी जोर दिया और कहा कि AAP एक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है कि उनकी सरकार को गिराने की तैयारी है, लेकिन बीजेपी फिलहाल ऐसा कुछ न करे।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा निर्णायक
उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की मांग वाली याचिकाएं आ चुकी हैं और दोनों ही अदालतें उसे खारिज कर चुकी हैं। हालांकि, अब केजरीवाल की जमानत याचिका का इंतजार है और ये देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट उस पर क्या फैसला देता है।
फैजान ने कहा, "मुझे लगता है कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक इस मामले में कुछ नहीं होगा, लेकिन अगर शीर्ष अदालत ने केजरीवाल को जमानत नहीं दी, तब ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की आशंका बढ़ सकती है।"
क्या सच में अधिकारियों पर लागू होती है आचार संहिता?
आतिशी ने एक और गंभीर आरोप लगाया कि नौकरशाह और अधिकारी आदर्श आचार संहिता का हवाला देते हुए मंत्रियों की बैठकों में आने से मना कर रहे हैं।
इस पर फैजान मुस्तफा ने कहा कि आमतौर पर कोई अधिकारी मंत्री से बड़ा नहीं हो सकता और न ही इस तरह का कोई नियम है कि चुनाव आचार संहिता लगने के बाद अधिकारी मंत्रियों की बैठक शामिल नहीं हो सकते हैं। राज्यों में जितने भी अधिकारी होते हैं, वो सभी राज्य सरकार के अधीन होते हैं।
हालांकि, उन्होंने समझाया कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है, तो यहां कुछ एक मामलों में स्थिति बदल सकती है। क्योंकि लैंड, पुलिस और लॉ एंड ऑर्डर केंद्र के हाथ में है, तो इन विभागों के सचिव या अधिकारियों पर राज्य सरकार के आदेश मानने का तो कोई दबाव वैसे भी नहीं होगा।