सुप्रीम कोर्ट (SC) ने बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की वर्किंग से जुड़े कुछ पहलुओं पर चुनाव आयोग (Election Commission) से स्पष्टीकरण मांगा, और दोपहर 2 बजे चुनाव पैनल के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी तलब किया। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) के साथ EVM के जरिए डाले गए वोटों के 100 फीसदी क्रॉस-चेकिंग की मांग करने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने कहा कि इसे कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण की जरूरत है। EVM पर चुनाव आयोग के FAQs में दिए गए जवाबों में कुछ भ्रम है।
बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी, जो चुनाव आयोग की ओर से पेश हुई थीं, उनसे कहा, "हम गलत नहीं होना चाहते, इसलिए अपने निष्कर्षों पर दोबारा आश्वस्त होना चाहते हैं और इसलिए हमने स्पष्टीकरण मांगने के बारे में सोचा।"
शीर्ष अदालत भाटी को दोपहर 2 बजे वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त नितेश कुमार व्यास को बुलाने के लिए कहा। व्यास ने इससे पहले EVM के काम करने के तरीके पर अदालत में एक प्रेजेंटेशन दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछे ये 4 सवाल:
1. कंट्रोलिंग यूनिट या VVPAT में माइक्रोकंट्रोलर लगा होता है?
2. माइक्रोकंट्रोलर वनटाइम प्रोग्राम करने योग्य है?
3. चुनाव आयोग के पास कितने सिंबल लोडिंग यूनिट उपलब्ध हैं?
4. चुनाव याचिका दायर करने की सीमा अवधि आपके अनुसार 30 दिन है और इस तरह स्टोरेट और रिकॉर्ड 45 दिनों तक बनाए रखा जाता है। लेकिन लिमिटेशन डे 45 दिन है, आपको इसे सही करना होगा।
इसने कुछ प्वाइंट्स को चिह्नित किया जिन पर अदालत स्पष्टीकरण चाहती थी, जो EVM के स्टोरेज, EVM की कंट्रोल यूनिट में माइक्रोचिप और बाकी पहलुओं से जुड़ा है।
VVPAT एक स्वतंत्र वोट वैरिफिकेशन सिस्टम है, जो मतदाताओं को यह देखने में सक्षम बनाती है कि उनका वोट सही तरीके से डाला गया है या नहीं।
18 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।