Gorakhpur Loksabha Seat: गोरखनाथ पीठ तय करता है गोरखपुर सीट की दशा और दिशा, लगातार पांच बार यहां से जीते CM योगी

Gorakhpur Loksabha Seat: पूर्वांचल के महत्वपूर्ण लोकसभा सीटों में से एक, गोरखपुर की यह सीट 1991 से लगातार भगवामय रही है. इसकी शुरुआत गोरखनाथ मठ से महंत अवैद्यनाथ ने की थी. इस परंपरा को आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस सीट से पांच बार लगातार सांसद रहे

अपडेटेड Apr 15, 2024 पर 9:44 PM
Gorakhpur Loksabha Seat: गोरखनाथ पीठ तय करता है गोरखपुर सीट की दशा और दिशा

Gorakhpur Loksabha Seat: गोरखपुर लोकसभा सीट, जिसकी दशा और दिशा गोरखनाथ मठ से तय होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कर्म स्थल भी गोरखपुर है और गृह जनपद भी, ऐसे में यूपी की लोकसभा सीट में बनारस के बाद यह दूसरी ऐसी सीट है, जिसे सबसे अहम माना जाता है। अब तक हुए लोकसभा चुनाव में 11 बार से ज्यादा मंदिर के महंत या उससे जुड़े लोगों ने ही जीत दर्ज की है। गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने 1991 में इस लोकसभा सीट से जीत हासिल कर इस परंपरा की शुरुआत की थी, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगे ले गए और 2017 तक लगातार योगी आदित्यनाथ 5 बार इस सीट से सांसद हुआ करते थे। पूर्वांचल की खास सीटों में से एक गोरखपुर के इस सीट पर 17 लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें 11 बार से ज्यादा मंदिर का प्रतिनिधित्व करने वाले या मंदिर के महंत ने इस चुनाव में जीत हासिल की है।

1967 में इस सीट पर हुई गोरक्षपीठ की एंट्री

गोरखपुर लोकसभा के अंदर पांच विधानसभा सीट गोरखपुर नगर, गोरखपुर ग्रामीण, कैंपियरगंज, पिपराईच, और सहजनवा हैं। इस लोकसभा में कुल 20,74,745 वोटर हैं, जिसमें 11,12,023 पुरुष हैं, जबकि महिला वोटर 9,62,531 है।


पूर्वांचल की यह सीट शुरू से काफी महत्वपूर्ण रही है, लेकिन साल 1967 में यहां की राजनीति में गोरखक्षपीठ की एंट्री हुई, 1970 में महंत अवैद्यनाथ ने यहां से जीत दर्ज की, लेकिन 1971 और 1984 तक कांग्रेस पार्टी फिर इस सीट से चुनाव जीतती रही।

फिर एक मोड़ आया, जिसमें 1989 में एक बार फिर महंत अवैद्यनाथ ने हिंदू महासभा की टिकट से यहां चुनाव जीते और संसद पहुंचे। इसके बाद 1991 से 2017 तक लगातार गोरखपुर की, यह सीट गोरखक्ष पीठ महंत के कब्जे में रही।

मठ ने किया था रवि किशन का समर्थन

पूर्वांचल के महत्वपूर्ण लोकसभा सीटों में से एक, गोरखपुर की यह सीट 1991 से लगातार भगवामय रही है। इसकी शुरुआत गोरखनाथ मठ से महंत अवैद्यनाथ ने की थी। इस परंपरा को आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस सीट से पांच बार लगातार सांसद रहे।

शहर के सीनियर एडवोकेट और पॉलीटिकल मामलों के जानकार प्रेमचंद पांडे बताते हैं कि गोरखपुर की जनता शुरू से बीजेपी को वोट तो डालती ही है, लेकिन उसके दिमाग में गोरखनाथ मठ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी रहते हैं।

ऐसे में पहली बार जब सीएम बनने के बाद मुख्यमंत्री ने इस सीट को छोड़ा और रवि किशन शुक्ला को यहां से टिकट दी गई तो, यह सीट गोरखनाथ मठ से बाहर चली गई। ऐसे में कई परिस्थितियों पैदा होती हैं।

इससे पहले ही गोरखनाथ मठ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रवि किशन शुक्ला का समर्थन किया। फिर 2019 के चुनाव में रवि किशन सांसद बने, उन्होंने समाजवादी पार्टी के रामभुआल निषाद को 301664 वोटो से हराया।

इस चुनाव में रवि किशन को 7,17,122 वोट मिले थे तो, वहीं सपा उम्मीदवार को 4,15,458 वोट मिले, जबकि SP और BSP मिलकर यहां से चुनाव लड़ा था और कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी।

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