Lok Sabha Elections 2024: क्या आपने एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई (K Anammalai) की वह फोटो देखी है, जिसमें प्रधानमंत्री अन्नामलाई का हाथ पकड़े नजर आ रहे हैं? पीएम मोदी ने सात दिन में तमिलनाडु का दो बार दौरा किया है। पीएम मोदी की अन्नामलाई के साथ फोटो और एक के बाद एक दो बार तमिलनाडु का दौरा इस बात का संकेत है कि BJP लोकसभा चुनावों में 370 से ज्यादा सीटें हासिल करने के अपने टारगेट को हासिल करने के लिए तमिलनाडु को कितना महत्व दे रही है। तिरुपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि तमिलनाडु राजनीतिक बदलाव के ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के मतदाता तीसरी बार केंद्र में भाजपा की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
2014 के चुनावों में भाजपा को सिर्फ एक सीट
पीएम मोदी का तमिलनाडु पर फोकस बढ़ने की एक वजह यह मानी जा रही है कि के अन्नामलाई की अगुवाई में राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं का हौसला बुलंद है। ऐसे में लोकसभा चुनावों में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन की अच्छी संभावनाएं हैं। अब तक तमिलनाडु में भाजपा बड़ी मतदाताओं का खास रिस्पॉन्स हासिल करने में नाकाम रही है। 2014 के चुनावों में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी पीएमके को एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा था। मुख्यमंत्री जे जयललिता की अगुवाई में सत्ताधारी एआईएडीएमके ने अप्रत्याशित जीत हासिल की थी। इससे डीएमके का सुपड़ा साफ हो गया था।
2019 में भाजपा को एक भी सीट नहीं
लेकिन, 2019 के चुनावों में पासा पलट गया। पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि के बेटे और डीएमके नेता स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके लोकसभा की 38 सीटों में से 37 सीटें हासिल करने में कामयाब रही। BJP के हाथ एक भी सीट नहीं आई। तब राज्य की कुल 39 लोकसभा सीटों में से 38 सीटों पर चुनाव हुए थे। चुनाव आयोग के निर्देश पर वेल्लोर सीट के लिए मतदान रोक दिया गया था। मतदाताओं को लुभाने के लिए कैश के इस्तेमाल के आरोप के बाद आयोग ने यह फैसला लिया था।
फिर से एआईएडीएमके को अपने पाले में लाने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 फरवरी को एआईएडीएमके के दिग्गज नेता एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता की खूब तारीफ की। के अन्नामलाई की 'ईन मन इन मक्कल' पदयात्रा के तिरुपुर में समापन भाषण में मोदी मे रामचंद्रन को बेमिसाल नेता बताया। उन्होंने जयललिता के शासन को राज्य के लोगों के प्रति उनकी सेवा का प्रतीक बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पीएम मोदी का टारगेट एआईएडीएमके का वोट बैंक था। कुछ एनालिस्ट्स का यह भी कहना है कि पीएम मोदी एआईएडीएमके को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले साल सितंबर तक एआईएडीएमके बीजेपी की सहयोगी पार्टी थी।
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