Loksabha Election 2024: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond) का बचाव करते हुए कहा कि इससे राजनीतिक फंडिंग (Political Funding) का खुलासा हुआ और "हर किसी को इसे खत्म करने का पछतावा होगा।" न्यूज एजेंसी ANI के साथ एक इंटरव्यू में कहा, "हमारे देश में लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि देश के चुनावों में काले धन का खेल खत्म होना चाहिए। चुनाव में पैसा खर्च होता है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। मेरी पार्टी भी खर्च करती है, सभी पार्टियां, उम्मीदवार खर्च करते हैं और पैसा लोगों से लेना पड़ता है।"
उन्होंने कहा, "मैं चाहता था कि हम चुनावों को इस काले धन से मुक्ति दिलाने के लिए कुछ कोशिश करें? मेरे मन में एक शुद्ध विचार था। हम रास्ता ढूंढ रहे थे। हमने एक छोटा सा रास्ता खोजा, हमने कभी यह दावा नहीं किया कि यह बिल्कुल सही रास्ता है।"
ईमानदारी से सोचेंगे तो पछतावा होगा: PM मोदी
उन्होंने ANI से कहा, “चुनावी बॉन्ड के कारण आपको पैसे का पता चल रहा था। किस कंपनी ने दिया या कैसे दिया? उन्होंने इसे कहां दिया? और इसीलिए मैं कहता हूं कि जब वे (विपक्ष) ईमानदारी से सोचेंगे, तो हर किसी को पछतावा होगा।"
उन्होंने कहा कि जब संबंधित विधेयक पारित किया गया था, तब इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर संसद में बहस हुई थी और जो लोग अब इस पर टिप्पणी कर रहे हैं, उनमें से कुछ ने इसका समर्थन किया था। उन्होंने काले धन से निपटने के प्रयासों के तहत 1,000 रुपए और 2,000 रुपए के करेंसी नोटों को बंद करने के सरकार के फैसले का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “इन नोटों को चुनाव के दौरान बड़ी मात्रा में ले जाया गया था। हमने यह कदम उठाया ताकि काला धन खत्म हो।" प्रधान मंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों को पहले 20,000 रुपए तक कैश दान की अनुमति थी और उन्होंने इसे बदलकर 2,500 रुपए कर दिया, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि “कैश कारोबार” जारी रहे।
कारोबारियों ने चेक से चंदा देने से किया इनकार
उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पहले सभी राजनीतिक चंदा चेक से लेने का फैसला किया था, लेकिन कारोबारी लोग आए और कहा कि वे इस जरिए भुगतान नहीं कर सकते, क्योंकि सरकार को पता चल जाएगा कि उन्होंने एक राजनीतिक दल को कितना योगदान दिया है और इससे उन्हें परेशानी होगी।
उन्होंने कहा, “मुझे याद है 90 के दशक में, बीजेपी को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। कोई पैसा नहीं था, क्योंकि हमारे पास यह नियम था। जो देना चाह रहे थे, उनमें ऐसा करने का साहस नहीं था...मुझे यह सब पता था... अब देखिए, अगर कोई इलेक्टोरल बॉन्ड नहीं होता, तो किस सिस्टम के पास यह पता लगाने की शक्ति होती कि पैसा कैसे आया और कहां गया... यह इलेक्टोरल बॉन्ड की सफलता की कहानी है। इस प्रक्रिया में जो हुआ वह अच्छा था या बुरा यह बहस का मुद्दा हो सकता है। इसमें भी सुधार की काफी गुंजाइश थी, लेकिन आज हमने देश को पूरी तरह से काले धन की ओर धकेल दिया है।"
63 फीसदी चंदा विपक्षी पार्टियों को मिला: मोदी
नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने इलेक्टोरल बांड पर झूठ फैलाने के लिए विपक्ष पर भी हमला किया और कहा कि स्कीम के जरिए दान देने वाली 3,000 कंपनियों में से 26 को ED जैसी जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इन 26 कंपनियों में से 16 ऐसी थीं, जिन्होंने चुनावी बांड लिए थे, “इनमें से (16 कंपनियों) 37 प्रतिशत राशि बीजेपी को और 63 प्रतिशत बीजेपी विरोधी विपक्षी दलों को गई।