PM मोदी के 'घुसपैठियों को संपत्ति बांटने वाले' बयान पर बवाल, राहुल गांधी, कांग्रेस घोषणापत्र में असल में क्या कहा गया
प्रधान मंत्री मोदी ने 2006 में अपने पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह की तरफ से दिए गए एक बयान को याद किया, जिसमें पूर्व प्रधान मंत्री ने सुझाव दिया था कि अल्पसंख्यकों, खासतौर से मुसलमानों को देश के संसाधनों पर पहला अधिकार होना चाहिए। पीएम मोदी ने तब लोगों को चेतावनी दी कि कांग्रेस सरकार देश की संपत्ति को "घुसपैठियों" और "जिनके ज्यादा बच्चे हैं" के बीच बांट देगी
MoneyControl News
अपडेटेड Apr 23, 2024 पर 9:47 PM
Lok Sabha Election 2024: PM मोदी के 'घुसपैठियों को संपत्ति बांटने वाले' बयान पर बवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के इस आरोप से कि अगर कांग्रेस (Congress) सत्ता में आई तो लोगों की संपत्ति "घुसपैठियों" के बीच बांट देगी, लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections 2024) के दूसरे चरण से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सबसे पुरानी पार्टी ने इस आरोप को "हास्यास्पद" बताते हुए खारिज कर दिया है। कांग्रेस घोषणापत्र मसौदा समिति के सदस्य प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा है कि पार्टी घोषणापत्र या उसके नेताओं की तरफ से दिए गए किसी भी बयान में ऐसा कुछ भी संकेत नहीं मिलता है।
आइए जानते हैं कि आखिर ये सब कब, कैसे और कहां से शुरू हुआ...
प्रधानमंत्री का कांग्रेस पर आरोप
रविवार को राजस्थान में एक रैली के दौरान, प्रधान मंत्री मोदी ने 2006 में अपने पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह की तरफ से दिए गए एक बयान को याद किया, जिसमें पूर्व प्रधान मंत्री ने सुझाव दिया था कि अल्पसंख्यकों, खासतौर से मुसलमानों को देश के संसाधनों पर पहला अधिकार होना चाहिए।
पीएम मोदी ने तब लोगों को चेतावनी दी कि कांग्रेस सरकार देश की संपत्ति को "घुसपैठियों" और "जिनके ज्यादा बच्चे हैं" के बीच बांट देगी, उन्होंने कहां कि उनका मतलब मुसलमानों से था।
उन्होंने वेल्थ डिस्ट्रिब्यूशन सर्वे पर राहुल गांधी की तरफ से दिए गए एक और बयान को याद करते हुए कहा कि सबसे पुरानी पार्टी "माताओं और बहनों के सोने और मंगलसूत्र भी चुरा लेगी"।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस के 'शहजादा' कहते हैं कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आई, तो वे जांच करेंगे कि कौन कितना कमाता है, किसके पास कितनी संपत्ति है... हमारी माताओं और बहनों के पास कितना सोना है। यह 'स्त्री धन' है, इसे पवित्र माना जाता है। कानून भी इसकी रक्षा करता है। अब इन लोगों की नजर महिलाओं के 'मंगलसूत्र' पर है। उनका इरादा माताओं-बहनों का सोना चुराने का है।"
बाद की रैलियों में, प्रधान मंत्री ने कांग्रेस और उसके कथित "तुष्टीकरण" झुकाव पर इन हमलों को तेज कर दिया।
उदाहरण के लिए, मंगलवार को उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई मौकों पर मुसलमानों के लिए आरक्षण लागू करने की कोशिश की, लेकिन असफल रही।
उन्होंने राजस्थान के टोंक में एक रैली में कहा, "2004 में जैसे ही कांग्रेस सरकार केंद्र में सत्ता में आई, उसका पहला काम आंध्र प्रदेश में SC/ST आरक्षण को कम करके मुसलमानों को आरक्षण देने की कोशिश करना था। यह एक पायलट प्रोजेक्ट था, जिसे कांग्रेस राज्य में आज़माना चाहती थी। 2004 से 2010 के बीच कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश में मुस्लिम आरक्षण लागू करने की चार बार कोशिश की, हालांकि कानूनी बाधाओं और सुप्रीम कोर्ट की जागरूकता के कारण वे अपनी योजनाओं को पूरा नहीं कर सके। 2011 में कांग्रेस ने इसे पूरे देश में लागू करने की कोशिश की।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने "विशेष वोट बैंक" के लिए आरक्षण हासिल करने के लिए SC/ST को दिए गए आरक्षण में सेंध लगाना चाहती है।
कांग्रेस के ये दो बयान
कांग्रेस के "वेल्थ डिस्ट्रिब्यूशन" वादों पर पीएम मोदी का हमला दो बयानों से उपजा है: एक पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की तरफ से दिया गया बयान और दूसरा राहुल गांधी की ओर से।
दिसंबर 2006 में, मनमोहन सिंह ने यह सुनिश्चित करने के लिए योजनाएं बनाने की जरूरत बताई थी कि अल्पसंख्यकों, खासतौर से मुसलमानों को विकास के लाभों में बराबर का अधिकार दिया जाए।
मनमोहन सिंह ने क्या कहा था: "मेरा मानना है कि हमारी सामूहिक प्राथमिकताएं कृषि, सिंचाई, जल संसाधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश के साथ ही SC/ST, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बच्चों का उत्थान है। हमें ऐसी नई योजनाएं बनानी होंगी, जिनसे अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों को विकास में समान भागीदारी मिल सके। देश के संसाधनों पर उनका पहला हक होना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "11वीं पंचवर्षीय योजना ऐसे बिंदु से शुरू हो रही है, जब हमारे देश की आर्थिक क्षमता ने हमारे संस्थापकों के उन सपनों को साकार करना संभव बना दिया है, जिसमें समृद्ध, समावेशी और न्यायसंगत भारत का सपना देखा गया था। एक ऐसा भारत जहां हर नागरिक को उसकी पूरी क्षमता से जीने का अवसर मिलेगा।"
हाल ही में, राहुल गांधी ने 7 अप्रैल को हैदराबाद में एक चुनावी रैली में कहा था कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई, तो यह सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी सर्वे कराएगी कि समाज के अलग-अलग वर्गों को उनकी आबादी के अनुसार पैसा वितरित किया जाए।
कांग्रेस नेता ने कहा, "सबसे पहले, हम पिछड़ी जातियों, SC, ST, अल्पसंख्यकों और दूसरी जातियों की सटीक जनसंख्या और स्थिति जानने के लिए एक जाति जनगणना करेंगे। उसके बाद, वित्तीय और संस्थागत सर्वे शुरू होगा। इसके बाद, हम ऐतिहासिक कार्यभार संभालेंगे। भारत की संपत्ति, नौकरियां और दूसरी कल्याणकारी योजनाएं, इन वर्गों को उनकी जनसंख्या के आधार पर वितरित करें।”
अक्टूबर 2023 में बिहार जाति सर्वेक्षण डेटा जारी होने के बाद राहुल का बयान उनके अपने नारे "जितनी आबादी, उतना हक" का आह्वान था। वास्तव में, राहुल वादा करते रहे हैं कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो वो देशभर में जाति जनगणना के बाद वित्तीय और आर्थिक सर्वे भी कराएगी।
कांग्रेस का घोषणापत्र असल में क्या कहता है?
5 अप्रैल को कांग्रेस की तरफ से जारी 45 पेज के "न्याय पत्र" में साफ तौर से ये तो नहीं कहा गया है कि वो वेल्थ रिडिस्ट्रिब्यूशन करेगी। हालांकि, इसमें देश में कमाई को लेकर असमानता को दूर करने की जरूरतों पर जरूरी रोशनी डाली गई है।
घोषणापत्र में कहा गया, "हम नीतियों में उपयुक्त बदलावों के माध्यम से धन और आय की बढ़ती असमानता को संबोधित करेंगे... कांग्रेस जातियों और उप-जातियों और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों की गणना करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना कराएगी। आंकड़ों के आधार पर हम सकारात्मक कार्रवाई के एजेंडे को मजबूत करेंगे।"
अल्पसंख्यकों पर, घोषणापत्र में कहा गया है कि "भारत की पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए अल्पसंख्यकों का आर्थिक सशक्तिकरण एक जरूरी कदम है"।
इसके बाद इसने अल्पसंख्यकों के अधिकारों को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कई वादे किए कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक रोजगार, पब्लिक वर्क कॉन्ट्रैक्ट में सही मौके मिले।
कांग्रेस की सफाई
विवाद को तूल न देते हुए कांग्रेस के प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि ऐसी बातें करना भी "विचित्र" है कि सरकार लोगों के संसाधनों को छीन सकती है। उन्होंने कहा कि राहुल ने जिसका जिक्र किया है, वो धन समानता का एक "दार्शनिक विचार" था।
चक्रवर्ती ने कहा, "मुझे लगता है कि गांधी जिस बात का जिक्र कर रहे थे वो 'जितनी आबादी, उतना हक' का ज्यादा दार्शनिक विचार है... वह सवाल पूछ रहे हैं - क्या हमें ऐसे समाज की इच्छा नहीं करनी चाहिए, जिसमें पहचान के अनुसार पुरस्कार और लाभ दिए जाएं? क्योंकि आज ऐसा नहीं है।''
उन्होंने कहा कि यह विचार यूटोपियन है या आदर्शवादी, यह बहस का विषय है, लेकिन यह ऐसी चीज है, जिसकी हम आकांक्षा कर सकते हैं और ज्यादातर नैतिक दार्शनिक इससे सहमत होंगे। उन्होंने उपहास करते हुए कहा, "हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार लोगों के घरों में आएगी और उनकी संपत्ति छीन लेगी।"
उन्होंने धन वितरण पर पीएम मोदी के बयानों को महज "भड़काऊ बयान" और पूरी तरह से राजनीतिक कहकर खारिज कर दिया।
बीजेपी सूत्रों ने News18 को बताया कि पीएम मोदी का आक्रामक रुख कांग्रेस नेताओं की तरफ से अतीत में दिए गए वास्तविक बयानों और उसके घोषणापत्र में किए गए वादों पर आधारित है।
बीजेपी के एक शीर्ष नेता ने News18 को बताया, “ये तो कांग्रेस को समझाने की जरूरत है कि ऐसे बयानों और वादों से उसके इरादे क्या हैं।”
भाजपा ने जाति जनगणना और सामाजिक-आर्थिक सर्वे के बाद अपने घोषणापत्र में कांग्रेस के "सकारात्मक कार्रवाई" के वादे पर भी सवाल उठाया। इसमें कहा गया है कि सबसे पुरानी पार्टी को अपने घोषणापत्र में स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए कि वो "यह सुनिश्चित करेगी कि अल्पसंख्यकों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक रोजगार, सार्वजनिक कार्य अनुबंध, कौशल विकास, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में बिना किसी भेदभाव के अवसरों का उचित हिस्सा मिले।"