आज लगातार 32वें दिन डीजल की कीमतों में गिरावट आई। हालांकि, पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया। हालांकि, अभी भी कई शहरों में दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में पेट्रोल और डीजल अपने उच्चतम स्तर पर बने हुए हैं। सवाल ये है कि महंगे तेल के लिए जिम्मेदार कौन, आइए जानने की कोशिश करते हैं।
पेट्रोल कीमतों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का एक बयान आया है जिसमें कहा गया है कि UPA सरकार के ऑयल बॉन्ड ने उनके हाथ बांध रखे हैं। ऑयल बॉन्ड के चलते टैक्स घटाना संभव नहीं है। इसके लिए ऑयल बॉन्ड का ब्याज और मूलधन चुकाना पड़ेगा।
बता दें कि UPA सरकार ने ऑयल बॉन्ड जारी किया था। UPA सरकार ने 1.44 लाख करोड़ का ऑयल बॉन्ड इश्यू किया था। 2014-15 में ऑयल बॉन्ड का बकाया 1.34 लाख करोड़ रुपए था। 2014-15 में ब्याज भुगतान का बकाया 10255 करोड़ रुपए था। मोदी सरकार ने 70,195 करोड़ का। ब्याज चुकाया है। इसके साथ ही मोदी सरकार ने 3500 करोड़ का मूलधन चुकाया है। 2026 तक सरकार को ब्याज के 37000 करोड़ देने हैं। 2026 तक सरकार को मूलधन के 1.30 लाख करोड़ रुपए देने हैं।
2014 से 2021 के बीच एक्साइज में भारी इजाफा देखने को मिला है। पेट्रोल पर एक्साइज 19.48 से बढ़कर 32.90 रुपए पर आ गया है। इसी अवधि में डीजल पर एक्साइज 3.56 से बढ़कर 31.80 रुपए पर आ गया है। इस अवधि में सरकार की एक्साइज से कमाई 99,068 करोड़ से बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है।
7 साल में एक्साइज से कमाई 3 गुना बढ़ी है। राज्य सरकारें टैक्स पर टैक्स लेती हैं । राज्य सेंट्रल ड्यूटी पर भी VAT लगाते हैं। डीलर प्राइस और डीलर कमिशन पर VAT लिया जाता है।