हैदराबाद रेप केस के दरिंदों का एनकाउंटर, बदलेगा न्यायिक व्यवस्था!

क्या अब वक्त आ गया है कि रेप जैसे संवेदनशील मामलों में तुरंत न्याय की व्यवस्था हो जिससे देश के नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़े।

अपडेटेड Dec 08, 2019 पर 2:04 PM
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हैदराबाद गैंगरेप के चारो आरोपी एनकाउंटर में ढेर कर दिए गए हैं, शुक्रवार सुबह पौने 6 बजे साइबराबाद पुलिस ने चारो आरोपियों का एनाकउंटर कर दिया है, इस खबर के आते ही ये मान लिया गया कि न्याय हो गया, पुलिस को इस काम के लिए बधाई दी जा रही है और माना जा रहा है कि न्याय तो ऐसे ही होना चाहिए, सिस्टम की कमजोरी से त्रस्त और गुस्से से भरे लोग ही नहीं संसद के अंदर बैठे लोग भी इसे ठीक मान रहे हैं, लेकिन कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि KYA अब न्याय KA यही तरीका ठीक माना जाएगा, क्या अदालतों का काम भी अब पुलिस करेगी, थानों में ही कचेहरी लगेगी, पता नहीं इसे कैसे लिया जाए, क्या कहा जाए पर बड़ी बहस तो है कि इंसाफ नहीं मिलेगा या इंसाफ में देरी होगी तो लोग कानून अपने हाथ में लेंगे फिर शक्ल भले ही पुलिस की हो।

शुक्रवार की सुबह देशभर के लोगों के लिए एक नई सुबह थी। लोग हैदराबाद गैंग रेप पीड़िता के लिए जल्द से जल्द इंसाफ की मांग कर रहे थे। सुबह हुई तो उन्हें लगा कि इंसाफ हो गया है। तेलंगाना पुलिस ने महिला डॉक्टर की गैंग रेप और हत्या के चारों आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया। पुलिस के मुताबिक वो सुबह तड़के सबूत जुटाने के लिए चारों आरोपियों को घटनास्थल पर लेकर गए थे। जब आरोपी उनके हथियार छीनकर भागने लगे तो पुलिस ने भी फायरिंग की जिसमें चारों की मौके पर मौत हो गई।

एनकाउंटर की खबर के बाद घटनास्थल पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। पुलिसकर्मियों के ऊपर फूल बरसाए गए। कोई उन्हें मिठाई खिला रहा था तो कोई कंधों पर बैठाकर उन्हें धन्यवाद दे रहा था। हैदराबाद गैंग रेप पीड़िता के परिवार वाले अब सुकून महसूस कर रहे हैं।

पुलिस के एनकाउंटर को जहां एक तरफ आम जनता का समर्थन मिला तो वहीं राजनीतिक पार्टियों में इस पर राय बंटी हुई दिखी। बीजेपी के अंदर कुछ नेता पुलिस का मनोबल बढ़ा रहे हैं तो कुछ इसे न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ बता रहे हैं। विपक्षी पार्टियां तेलंगाना पुलिस की कार्रवाई का समर्थन तो कर रही हैं। लेकिन उनका मानना है कि इंसाफ न्यायिक प्रक्रिया के जरिए मिलता तो अच्छा रहता।

सभी आरोपी पुलिस की कस्टडी में थे तभी उनका एनकाउंटर हुआ है। इसलिए इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने जांच के आदेश दे दिए हैं। इस मामले की पुलिस जांच भी होगी। सवाल ये है कि क्या रेप के आरोपियों से निपटने का एनकाउंटर सही तरीका है? क्या इस मामले को नजीर बनाकर आगे बढ़ा जा सकता है? क्या हमारा देश की अदालत और न्यायिक व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। इसलिए हम तुरंत इंसाफ के लिए एनकाउंटर को सही तरीका मान रहे हैं? क्या अब वक्त आ गया है कि रेप जैसे संवेदनशील मामलों में तुरंत न्याय की व्यवस्था हो जिससे देश के नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़े।

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