रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को समाप्त करने से जुड़े नियमों की अधिसूचना जारी होने के बाद केंद्र सरकार इस विवादास्पद टैक्स से जुड़े क्लेम को वापस लेने और इन मामलों के निपटारे की मांग करने के लिए कंपनियों को 45 दिन की अवधि देगी। विवाद की स्थिति के आधार पर सरकार इस प्रक्रिया को तीन से पांच महीनों में पूरा करना चाहती है।
केयर्न एनर्जी Plc और वोडाफोन ग्रुप Plc सहित इस विवाद में शामिल कंपनियों को निर्धारित टैक्स अधिकारी को एक हलफनामा देकर सभी क्लेम, याचिकाओं, अपील और आब्रिट्रेशन के फैसले को लागू करवाने की कोशिशों को वापस लेने की सहमति देनी होगी।
इस टैक्स को वापस लेने के लिए हाल ही में इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन किया गया था।
कंपनियों के हलफनामा देने के बाद टैक्स अधिकारी इसे 15 दिनों के अंदर स्वीकार कर सकते हैं।
इस टैक्स से जुड़े जिन मामलों में कंपनियों ने अपील, आब्रिट्रेशन जैसी कार्यवाही शुरू की है या आब्रिट्रेशन के फैसले को लागू करवाने के उपाय किए जा रहे हैं, उनके निपटारे में अधिक समय लग सकता है।
आधिकारिक अनुमान के अनुसार, इस तरह के विवादों में कुल टैक्स रिफंड लगभग 8,100 करोड़ रुपये का है। इनमें से कुछ ही मामलों में रिफंड की जरूरत है। इनमें लगभग 7,900 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा रिफंड केयर्न एनर्जी को मिलना है।