3 लाख करोड़ रुपये का भारतीय इक्विटी बाजार इतिहास बनाने के सफर पर निकला नजर आ रहा है। इसने हाल ही में फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से दुनिया के छठवें सबसे बड़े इक्विटी मार्केट का दर्जा हासिल कर लिया है। इस क्रम में सेसेंक्स ने 60,000 को भी पार कर लिया जबकि निफ्टी 18,000 के बहुत नजदीक नजर आ रहा है।
बाजार जानकारों का कहना है कि यह रैली एक Bubble नहीं है। बाजार को सपोर्ट करने के लिए इस समय कई फैक्टर काम कर रहे हैं जिससे इसमें रैली देखने को मिल रही है। इस तेजी का सिर्फ एक कारण ना होकर कई कारण हैं। अलग -अलग कारणों पर नजर डालें तो यह सूची में जीडीपी ग्रोथ में तेजी से लेकर कोर सेक्टर के आकंड़ों में आई बढ़त, सरकार की तरफ से वित्तीय स्थिति और मांग को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले तमाम कदम, मैन्यूफैक्चरिंग के लिए अलग-अलग सेक्टरों के लिए लाई जा रही PLI, व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी , इंफ्रा पर सरकार की तरफ से बढ़ाया जा रहा खर्च और प्राइवेट- MSME सेक्टर को बूस्ट देने के लिए आसान कर्ज जैसे तमाम कारणों तक जाती है।
इसके अलावा कोरोना टीकाकरण की गति में आई जोरदार तेजी और कोरोना रिकवरी रेट में सुधार से इस बात की उम्मीद बढ़ी है कि जल्द ही इकोनॉमी पूरी तरह से खुल सकती है। इसके साथ ही पूरी दुनिया से भारत में एफडीआई आता दिख रहा है जिससे बाजार में जोरदार लिक्विडिटी है। जिसके चलते बाजार हाई पर हाई लगा रहा है। इस तरह घरेलू कारणों के साथ ही ग्लोबल फैक्टर भी भारतीय बाजारों में तेजी पैदा कर रहे हैं। ग्लोबल इकोनॉमी रिकवरी से भी भारतीय बाजारों को फायदा मिल रहा है।
कोरोना की मार से सबसे पहले और सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टरों में शामिल ऑटो मोबाइल सेक्टर में भी अब पेंटअप डिमांड के चलते उम्मीद जगती दिख रही है। तमाम कंपनियों ने फिर से कारोबार शुरु कर दिया है। उम्मीद है कि आने वाले तिमाहियों में ऑटो सेक्टर में तेजी देखने को मिलेगी।
भारतीय बाजारों में ग्रोथ की व्यापक संभावना है। हालांकि इस समय वैल्यूएशन के नजरिए से बाजार थोड़ा महंगा नजर आ रहा है। जिसको ध्यान में रखते हुए इस समय बुनियादी तौर पर मजबूत चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी। बैंकिंग, ऑटो, फाइनेंस जैसे सेक्टरों पर ज्यादा फोकस करना चाहिए।