F&O Trading: ऑप्शंस ट्रेडिंग में होगा बड़ा बदलाव! ट्रेडर्स को राहत देने के लिए SEBI का नया प्रस्ताव
F&O Trading: मार्केट रेगुलेटर SEBI ने ऑप्शंस ट्रेडिंग को आसान बनाने के लिए नया प्रस्ताव रखा है। इसके तहत एक्सचेंजों को बाजार की चाल के हिसाब से नए स्ट्राइक प्राइस जोड़ने और पुराने हटाने की ज्यादा आजादी मिल सकती है। इससे ट्रेडर्स को तेज उतार-चढ़ाव के दौरान राहत मिलने की उम्मीद है। जानिए पूरी डिटेल।
SEBI के प्रस्ताव के मुताबिक सभी स्टॉक एक्सचेंजों को ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए स्पष्ट नियम बनाने होंगे।
F&O Trading: कैपिटल मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ऑप्शंस ट्रेडिंग को आसान बनाने के लिए नया प्रस्ताव रखा है। इसके तहत स्टॉक एक्सचेंजों को स्ट्राइक प्राइस तय करने और उन्हें बाजार की जरूरत के हिसाब से जोड़ने या हटाने में ज्यादा लचीलापन मिलेगा। इसका मकसद तेज उतार-चढ़ाव के दौरान भी ट्रेडिंग को सुचारु बनाए रखना है। मनीकंट्रोल ने 28 अप्रैल को सबसे पहले बताया था कि सेबी इस तरह के बदलाव पर विचार कर रहा है।
क्या होता है स्ट्राइक प्राइस?
स्ट्राइक प्राइस वह तय कीमत होती है, जिस पर किसी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के तहत शेयर या इंडेक्स को खरीदा या बेचा जा सकता है। ट्रेडर बाजार की दिशा के हिसाब से अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस चुनते हैं। कई निवेशक इनका इस्तेमाल अपने निवेश को जोखिम से बचाने के लिए भी करते हैं। इसलिए पर्याप्त स्ट्राइक प्राइस उपलब्ध होना जरूरी माना जाता है।
सेबी ने कहा कि कई बार बाजार में दिन के दौरान बहुत तेज बढ़त या गिरावट आती है। ऐसे में कीमतें उपलब्ध सबसे दूर के स्ट्राइक प्राइस से भी आगे निकल जाती हैं। इससे ट्रेडर्स को मनचाहे कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिल पाते। नतीजतन ट्रेडिंग करना मुश्किल हो जाता है।
क्या करेगा सेबी का प्रस्तावित नियम
मान लीजिए निफ्टी 25,000 पर ट्रेड कर रहा है। ऐसे में 24,900, 25,000 और 25,100 जैसे कई स्ट्राइक प्राइस उपलब्ध होंगे। अगर किसी ट्रेडर को लगता है कि निफ्टी बढ़ेगा, तो वह अपनी रणनीति के हिसाब से इनमें से कोई स्ट्राइक प्राइस चुन सकता है।
लेकिन अगर बाजार अचानक 25,700 तक पहुंच जाए और उससे जुड़े नए स्ट्राइक प्राइस उपलब्ध न हों, तो ट्रेडर्स के लिए सही ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट चुनना मुश्किल हो जाएगा। सेबी का प्रस्ताव ऐसी स्थिति में तुरंत नए स्ट्राइक प्राइस जोड़ने की सुविधा देने से जुड़ा है।
एक्सचेंजों को बनाने होंगे स्पष्ट नियम
प्रस्ताव के मुताबिक सभी स्टॉक एक्सचेंजों को ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए स्पष्ट नियम बनाने होंगे। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि बाजार भाव के आसपास पर्याप्त संख्या में इन-द-मनी (ITM) और आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) स्ट्राइक प्राइस मौजूद रहें। इसके लिए रोजाना समीक्षा भी करनी होगी। बाजार से बहुत दूर चले गए और कम इस्तेमाल होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स को हटाने की व्यवस्था भी करनी होगी।
ट्रेडिंग के दौरान भी जुड़ सकेंगे नए कॉन्ट्रैक्ट
सेबी ने सुझाव दिया है कि बाजार समय के दौरान भी नए स्ट्राइक प्राइस जोड़े जा सकें। अगर किसी शेयर या इंडेक्स में अचानक बड़ी चाल आती है तो उसी दिशा में नए ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च किए जा सकेंगे। इससे ट्रेडर्स के पास ज्यादा विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
सेबी का कहना है कि यह प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे ब्रोकरों या बाजार सहभागियों को ट्रेडिंग के दौरान अपने सिस्टम में बदलाव न करना पड़े।
ब्रोकरों के सिस्टम पर भी पड़ता है असर
परामर्श पत्र में कहा गया है कि स्ट्राइक इंटरवल का सीधा असर ट्रेडिंग गतिविधियों पर पड़ता है। इन्हीं के आधार पर बाजार में उपलब्ध उत्पाद तय होते हैं। इन कॉन्ट्रैक्ट्स को ब्रोकरों के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर रोजाना लोड करना पड़ता है। इसलिए इसका असर उनके तकनीकी सिस्टम पर भी पड़ता है।
एक्सचेंजों को मिलेगी ज्यादा आजादी
सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि नियमों का मूल ढांचा एक जैसा रहेगा। लेकिन उसे लागू करने के तरीके में एक्सचेंजों को कुछ स्वतंत्रता मिलेगी। वे तय कर सकेंगे कि स्ट्राइक प्राइस के बीच कितना अंतर रखा जाए। कितने नए कॉन्ट्रैक्ट जोड़े जाएं। और बाजार भाव से दूर मौजूद कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए बड़ा इंटरवल रखा जाए या नहीं।
वेबसाइट पर देनी होगी जानकारी
सेबी चाहता है कि सभी एक्सचेंज अपने स्ट्राइक प्राइस प्रबंधन नियम वेबसाइट पर सार्वजनिक करें। साथ ही समय-समय पर बाजार सहभागियों से चर्चा कर उनकी समीक्षा भी करें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और जरूरत पड़ने पर नियमों में सुधार किया जा सकेगा।
अभी क्यों जरूरी है यह बदलाव?
फिलहाल सेबी के नियम मुख्य रूप से लंबी अवधि वाले इंडेक्स ऑप्शंस पर लागू होते हैं। वहीं स्टॉक, करेंसी और कमोडिटी ऑप्शंस में अलग-अलग एक्सचेंज अपनी व्यवस्था के अनुसार काम करते हैं। इससे विभिन्न बाजारों में स्ट्राइक प्राइस के संचालन का तरीका अलग-अलग हो जाता है। सेबी का मानना है कि एक समान ढांचा बनने से यह समस्या दूर होगी और ऑप्शंस बाजार ज्यादा व्यवस्थित बनेगा।
15 जून तक मांगे गए सुझाव
सेबी ने इस प्रस्ताव पर निवेशकों, ब्रोकरों और अन्य बाजार सहभागियों से सुझाव मांगे हैं। सार्वजनिक टिप्पणियां 15 जून 2026 तक भेजी जा सकती हैं। इसके बाद मिले सुझावों के आधार पर अंतिम नियम तय किए जाएंगे।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।