BSE-1000 के 65% शेयरों का तीन साल में रिटर्न जीरो, आधे शेयरों ने 5 साल की बढ़त गंवाई

भारतीय शेयर बाजार में जारी गिरावट अब लंबी अवधि के निवेशकों को भी प्रभावित करने लगी है। लगातार भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते बड़ी संख्या में शेयरों के रिटर्न नेगेटिव हो गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, BSE 1000 इंडेक्स के करीब 65% शेयरों ने तीन साल के CAGR आधार पर नेगेटिव रिटर्न दिया है

अपडेटेड Mar 20, 2026 पर 9:48 AM
Story continues below Advertisement
BSE-1000 इंडेक्स के आधे शेयरों में 5 साल में फ्लैट या नेगेटिव रिटर्न दिया है

भारतीय शेयर बाजार में जारी गिरावट अब लंबी अवधि के निवेशकों को भी प्रभावित करने लगी है। लगातार भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते बड़ी संख्या में शेयरों के रिटर्न नेगेटिव हो गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, BSE 1000 इंडेक्स के करीब 65% शेयरों ने तीन साल के CAGR आधार पर नेगेटिव रिटर्न दिया है। वहीं, लगभग आधे शेयरों ने पांच साल की अवधि में भी अपने रिटर्न पूरी तरह गंवा दिए हैं।

इन 65% शेयरों में से 258 शेयरों ने तीन साल के CAGR बेसिस पर 1-10 परसेंट का नेगेटिव रिटर्न दिया। वहीं 168 स्टॉक्स में 10-20 परसेंट के बीच गिरावट आई और 119 स्टॉक्स 20-50 परसेंट की रेंज में गिरे। इसके अलावा 119 शेयर ऐसे भी रहे, जिनमें इस अवधि में लगभग फ्लैट रिटर्न दिया।

पांच साल के CAGR आधार पर भी स्थिति चिंताजनक रही। इसमें 205 स्टॉक्स ने 1-10 प्रतिशत का नेगेटिव रिटर्न दिया, 95 स्टॉक्स में 10-20 प्रतिशत के बीच गिरावट आई और 57 स्टॉक्स में 20-50 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।


Nifty 100 में भी कमजोरी

इसी तरह लार्जकैप कंपनियों वाले निफ्टी 100 इंडेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली है। यहां करीब 50% शेयर तीन साल के रिटर्न के आधार पर नेगेटिव हो चुके हैं। वहीं करीब 30% शेयरों ने पिछले पांच सालों में कोई रिटर्न नहीं दिया है।

तीन साल में 17 शेयरों ने लगभग फ्लैट रिटर्न दिया, जबकि 34 शेयरों में 1–20% की गिरावट देखी गई। पांच साल के आधार पर 13 शेयर फ्लैट रहे और 16 शेयरों में 1–20% की गिरावट दर्ज की गई।

मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा दबाव

बाजार में सबसे ज्यादा दबाव मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में देखा जा रहा है। BSE मिडकैप 150 इंडेक्स में करीब 50% शेयर तीन और पांच साल दोनों अवधि में नकारात्मक हो गए हैं।

वहीं BSE स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में करीब 65% शेयर तीन साल के आधार पर और करीब 50% शेयर पांच साल के आधार पर गिरावट में हैं। इससे साफ है कि ब्रॉडर मार्केट में कमजोरी ज्यादा गहरी है।

कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ा कारण

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जो मिडिल ईस्ट में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद करीब 55% की बढ़त दिखाता है।

तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बन सकता है। इसका सीधा असर इक्विटी बाजार पर पड़ता है।

केंद्रीय बैंकों का सतर्क रुख

दुनियाभर के केंद्रीय बैंक भी सतर्क नजर आ रहे हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरें स्थिर रखीं, लेकिन अनिश्चितता को लेकर चिंता जताई है। वहीं बाजार अब यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने भी दरों को स्थिर रखा, लेकिन महंगाई को लेकर जोखिम बने रहने की बात कही।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव

विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से करीब 7.8 अरब डॉलर की निकासी की है, जबकि बॉन्ड बाजार से भी करीब 939 मिलियन डॉलर निकाले गए हैं। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस भी सतर्क हो गए हैं। Morgan Stanley ने भारत की रेटिंग घटाई है, जबकि Citigroup ने FY27 की कमाई पर जोखिम की चेतावनी दी है।

यह भी पढ़ें- IT Stocks: इन तीन आईटी कंपनियों ने AI पर बढ़ाया जोर, शेयरों पर दिख सकता है असर

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।