जुलाई तक होगी करीब 40 लाख शादियां, ट्रेडरों को 5 लाख करोड़ रुपये के कारोबार ही हैं उम्मीद

B.C. Bhartia ने आगे कहा कि भारतीय शादियों में करीब 20 फीसदी पैसा वर और वधु साइड पर खर्च किया जाता है जबकि 80 फीसदी पैसा थर्ड एजेंसी को जाता है.

अपडेटेड Mar 30, 2022 पर 4:41 PM
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इस वेडिंग सीजन में करीब 50,000 शादियां ऐसी हो सकती है जिनमें प्रति शादी औसत खर्च 50 लाख रुपये हो सकता है।

इस साल की जोरदार होली के बाद पूरे देश के कारोबारी अब शादियों की सीजन की तैयारी कर रहे है। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि पूरे देश में अप्रैल मध्य से जुलाई के शुरुआत तक करीब 40 लाख शादियां होगी। ट्रेडरों को शादियां के इस मौसम में 5 लाख करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है। इसमें से अधिकांश पैसा शादियों से जुड़े खरीदारी और शादियों से जुड़े तमाम सेवाओं में खर्च होगा।

कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि शादियों के इस मौके में अगले दिल्ली में 3 लाख से ज्यादा शादियां होनी की संभावना है। जिससे राजधानी में करीब 1 लाख करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है। खंडेलवाल ने आगे कहा कि कोविड के चलते लागू प्रतिबंधों को हटाए जाने से कारोबारी काफी उत्साहित होंगे और शादियों की सीजन में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए शादियों से जुड़ी वस्तुओं और सेवाओं के लिए बढ़ चढ़कर इंतजाम करेंगे।

गौरतलब है कि पिछले 2 साल के दौरान देश भर में फैले कोविड संक्रमण के कारण शादियों के मौसम में भी तमाम तरह के प्रतिबंध लागू थे जिसके चलते शादियों के दौरान होने वाले तड़क फड़क होने वाले इंतजाम नही हो पाए। इसके अलावा शादियों के लिए काफी कम शुभ दिनों की उपलब्धता के कारण ही 2 साल से इस सीजन में काफी मंदी देखने को मिली। लेकिन आगामी शादियों का मौसम करीब 43 दिनों का होगा। और इसमें कोरोना के कारण लागू प्रतिबंध भी नहीं होगे। ऐसे में कारोबारियों को अपना कारोबार चमकने की उम्मीद है।


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CAIT के नेशनल प्रेसिडेंट B.C. Bhartia का अनुमान है कि 2 लाख रुपये प्रति शादी के औसत खर्च पर करीब 5 लाख शादियां होने की संभावना है जबकि 10 लाख शादियां ऐसी होगी जिसका औसत खर्च 5 लाख रुपये हो सकता है। वहीं 10 लाख रुपये औसत खर्च वाली शादियां भी करीब 10 लाख का आंकड़ा छू सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस वेडिंग सीजन में करीब 50,000 शादियां ऐसी हो सकती है जिनमें प्रति शादी औसत खर्च 50 लाख रुपये हो सकता है। इसी तरह करीब 50,000 शादियां ऐसी हो सकती है जिनका प्रति शादी खर्च 1 करोड़ रुपये हो सकता है।

B.C. Bhartia ने आगे कहा कि भारतीय शादियों में करीब 20 फीसदी पैसा वर और वधु साइड पर खर्च किया जाता है जबकि 80 फीसदी पैसा थर्ड एजेंसी को जाता है।उन्होंने आगे कहा कि शादी के स्थल और शादी से जुड़े दूसरे सेवाओं पर होने वाले खर्च के अलावा एक बड़ा खर्चा शादी के मौके पर कराए जाने वाली घर की मरम्मत और पेटिंग के काम में भी जाता है। इसके अलावा शादियों के मौसम ज्वेलरी, कपड़ो, ग्रेटिंग कार्ड, मिठाई, फल , इलेक्ट्रोनिक, मोटर व्हीकल और दूसरे गिफ्ट आइटम्स पर भी होता है।

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