कच्छ के खावड़ा में अदाणी ग्रीन एनर्जी का कमाल, बनाया देश का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम

यह चीन के बाद दुनिया का सब से बड़ा सिंगल लोकेशन BESS है। इस BESS में पूरे दिन ग्रीन एनर्जी का स्टोरेज होता है। वहीं, यह पीक अवर्स में पॉवर रिलीज करता है। अभी यह हर 2.30 घंटे में पावर रिलीज कर रहा है

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 1:51 PM
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कंपनी ने इस पर अब तक 5,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। यहां 288 कंटेनर में 3.37 GWh ग्रीन एनर्जी का स्टोरेज होता है। हर कंटेनर में 5000 हाई लिथियम बैटरी लगाई गई है

कच्छ के खावड़ा में अदाणी ग्रीन एनर्जी ने भारत का सब से बड़ा एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS)लगाया है। इसी जगह पर ग्रीन एनर्जी का उत्पादन भी होता है। 3.37 GWh की क्षमता वाले इस BESS ने काम शुरू कर दिया है। यह चीन के बाद दुनिया का सब से बड़ा सिंगल लोकेशन BESS है। इस BESS में पूरे दिन ग्रीन एनर्जी का स्टोरेज होता है। वहीं, यह पीक अवर्स में पॉवर रिलीज करता है। अभी यह हर 2.30 घंटे में पावर रिलीज कर रहा है।

खावड़ा परियोजना की कुल स्टोरेज क्षमता 3.37 GWh है। खावड़ा में 30 GW क्षमता वाले रिन्यूएबल पार्क की योजना पर काम चल रहा है। कुल ऑपरेशनल क्षमता पर बात करें तो इस नई शुरुआत के साथ, पूरे भारत में दाणी ग्रीन एनर्जी की कुल चालू रिन्यूएबल क्षमता बढ़कर 19,785.8 मेगावाट हो गई है।

सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ये प्राकृतिक जैसे सूरज की रोशनी और हवा पर निर्भर होते हैं। इसमें असली चुनौती यह होती है कि क्या इस तरह से उत्पादित ऊर्जा को स्टोर करके उस समय सप्लाई किया जा सकता है, जब मांग अपने चरम पर हो? यहीं पर बैटरी स्टोरेज तकनीक एक गेम चेंजर के रूप में सामने आती है। खावड़ा में स्थापित यह अत्याधुनिक बैटरी सिस्टम अतिरिक्त रिन्यूएबल पावर को स्टोर करने में सक्षम है, जिसे बाद में आवश्यकतानुसार जारी किया जा सकता है। इससे न केवल पावर ग्रिड को सपोर्ट मिलती है, बल्कि ग्रीन पावर की निर्भरता और विश्वसनीयता भी काफी बढ़ जाती है।


कंपनी ने इस पर अब तक 5,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। यहां 288 कंटेनर में 3.37 GWh ग्रीन एनर्जी का स्टोरेज होता है। हर कंटेनर में 5000 हाई लिथियम बैटरी लगाई गई है। इस BESS का काम सिर्फ 10 महीने में ही पूरा हुआ है। खावड़ा में शुरू हुआ यह बैटरी स्टोरेज सिस्टम न केवल अदाणी ग्रीन के पोर्टफोलियो को मजबूत करता है, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन (क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन) में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ग्रिड की स्थिरता और पीक डिमांड के प्रबंधन के लिए इस तरह का तकनीकी ढांचा भारतीय ऊर्जा बाजार के भविष्य की दिशा तय करने वाला है।

 

 

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