Adani Group News: अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) के झटके से अदाणी ग्रुप (Adani Group) की कंपनियों के शेयर धीरे-धीरे उबर रहे हैं। हालांकि अभी भी सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ग्रुप निवेशकों और लेंडर्स से फ्री कैश हासिल करने के लिए लुभा सकता है? अदाणी ग्रुप के कुछ कारोबार को तत्काल पैसों की जरूरत है। जैसे कि अदाणी ट्रांसमिशन (Adani Transmission) की बात करें तो सोमवार को इसने दावा किया कि इसके पास देश के कोन-कोने में बिजली पहुंचाने की क्षमता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर बिजली सप्लाई के लक्ष्य के मुताबिक ही है। हालांकि इसके लिए ग्रुप को भारी-भरकम नगदी की जरूरत पड़ेगी। फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) की भारतीय इकाई के मुताबिक मौजूदा प्रोजेक्ट्स के लिए मार्च 2026 तक कंपनी में 70 करोड़ डॉलर ( 5795 करोड़ रुपये) के निवेश की जरूरत पड़ेगी।
Adani Transmission क्यों है अहम
अदाणी ट्रांसमिशन देश की सबसे बड़ी प्राइवेट यूटिलिटी फर्म है। इसका एसेट पोर्टफोलियो सात साल में 3.6 गुना बढ़कर 33 प्रोजेक्ट्स में 19779 सर्किट किलोमीटर्स (ckm) हो गया। इसमें से 13 प्रोजेक्ट्स अभी चल रही हैं। हालांकि इनमें से कई परियोजनाओं में देरी या लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है जिसमें सबसे बड़ा एक प्रोजेक्ट वरोरा-कुरनूल ट्रांसमिशन लाइन है भी जो तीन बड़े दक्षिण भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है।
इसके अलावा बाकी प्रोजेक्ट भी खराब मौसम, महामारी के दौर की दिक्कतों या कानूनी झंझटों से घिरे हुए हैं जो देश में इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए आम समस्या बन चुकी हैं। ऐसे में अदाणी ट्रांसमिशन का तेजी से विस्तार पॉजिटिव सिग्नल है। सरकार की योजना 2025 तक 27 हजार सीकेएम से अधिक ट्रांसमिशन लाइन जोड़ने की है और इस लक्ष्य के लिए अदाणी ट्रांसमिशन का विस्तार काफी अहम है।
अदाणी ट्रांसमिशन ने इस महीने की शुरुआत में 100 करोड़ डॉलर का फंड जुटाने का ऐलान किया था। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के निदेशक (इक्विटी स्ट्रैटजी) क्रांति बातिनी (Kranthi Bathini) के मुताबिक यह कंपनी हमेशा से कैपेक्स को लेकर आक्रामक रही है और ऐसे में 100 करोड़ डॉलर के फंड से इसे अपनी ग्रोथ मोमेंटम को बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि इसके लिए कंपनी को अतिरिक्त कर्ज भी जुटाना पड़ सकता है क्योंकि ट्रांसमिशन कारोबार में काफी अधिक वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ती है।
फिच रेटिंग्स की भारतीय इकाई इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुताबिक मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर मार्च 2026 तक इसे 5795 करोड़ रुपये (70 करोड़ डॉलर) के निवेश की जरूरत पड़ेगी। यह बढ़ती लागत या पर्याप्त कर्ज उपलब्ध न होने की स्थिति में अनुमान लगाया गया है जिसके चलते कंपनी को और निवेश करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इंडिया रेटिंग्स ने अंडर-कंस्ट्रक्शन की ट्रांसमिशन लाइन्स के लिए डेट फंडिंग से जुड़ी अनिश्चितता के चलते अदाणी ट्रांसमिशन का आउटलुक निगेटिव कर दिया है।
कहां से फंड मिल सकता है कंपनी को
कुछ बड़े निवेशक अदाणी ट्रांसमिशन जैसी अहम कंपनियों में निवेश को लेकर इच्छुक दिख रहे हैं। जीक्यूजी पार्टनर्स के मुख्य निवेश अधिकारी राजीव जैन ने पिछले हफ्ते न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग से बातचीत में कहा था कि इसने अदाणी ग्रुप में अपना निवेश बढ़ाया है और अब इसकी होल्डिंग्स अब करीब 350 करोड़ डॉलर की है। हालांकि राजीव ने यह भी कहा कि अगर ग्रुप फिर से शेयरों की बिक्री का फैसला करता है तो वह इसे खरीदेंगे क्योंकि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में यह सबसे मजबूत स्थिति में है। उनका कहना है कि भारत में अदाणी ग्रुप के अलावा कोई भी बड़े पैमाने पर क्वालिटी इंफ्रा नहीं तैयार कर रहा है।