Aequs Share Price: सितंबर तिमाही में घाटे में तेज उछाल और ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में गिरावट ने एक्वस के रेवेन्यू में उछाल का जश्न फीका कर दिया और शेयर करीब 19% टूट गए। निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद अभी भी यह तगड़े घाटे में हैं। एयरोस्पेस और कंज्यूमर कंपोनेंट्स बनाने वाली एक्वस के शेयर फिलहाल बीएसई पर 10.90% की गिरावट के साथ ₹215.70 पर हैं। इंट्रा-डे में यह 18.81% टूटकर ₹196.55 तक आ गया था।
इसके शेयर पिछले साल 10 दिसंबर 2025 को लिस्ट हुए थे और ₹922 करोड़ के आईपीओ के तहत प्रति शेयर ₹124 के भाव पर जारी हुए थे। लिस्टिंग के बाद कुछ ही महीने में टूटकर 16 मार्च 2026 को बीएसई पर एक्वस के शेयर ₹113.65 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए थे, जिससे सात ही महीने में यह 159.48% उछलकर 6 अक्टूबर 2026 को ₹294.90 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था।
Aequs Q2 Results: खास बातें
चालू वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही जून-सितंबर 2026 में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 45% बढ़कर ₹409 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन इस दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा ₹21 करोड़ से बढ़कर ₹52.3 करोड़ पर पहुंच गया।
ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी को झटका लगा और इस दौरान कंपनी का ईबीआईटीडीए 51.7% गिरकर ₹14 करोड़ और ईबीआईटीडीए मार्जिन भी 10% से 3.37% पर आ गया।
इसके रेवेन्यू को कंज्यूम बिजनेस में जोरदार तेजी से सपोर्ट मिला। हालांकि सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते प्रोडक्शन में देरी हुई तो डेप्रिसिएशन और फाइनेंस की लागत में उछाल ने इसके प्रॉफिट पर दबाव डाला।
एयरोस्पेस सेगमेंट में कंपनी को ₹322 करोड़ का रेवेन्यू मिला और इसके साथ ही पहली छमाही में सालाना आधार पर यह 42% बढ़कर ₹637 करोड़ पर पहुंच गया।
कंज्यूमर सेगमेंट में कंपनी को सितंबर तिमाही में ₹87 करोड़ का रेवेन्यू मिला और इसके साथ ही सितंबर छमाही में यह ₹63 करोड़ से बढ़कर ₹168 करोड़ पर पहुंच गया।
खास बात ये रही कि नतीजे आने के बाद कंपनी के मैनेजमेंट ने कंज्यूमर बिजनेस में ईबीआईटीडीए के मामले में मार्च 2027 तिमाही तक ब्रेकइवन हासिल करने का जो लक्ष्य पहले तय किया था, उसे वापस ले लिया लेकिन नए लक्ष्य का ऐलान भी नहीं किया। कंपनी ने मार्च 2027 तिमाही तक 40-50% तक कंज्यूमर कैपेसिटी यूटिलाइजेशन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है।
मैनेजमेंट ने अने बिजनेस को वित्त वर्ष 2031 तक चार से छह गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य दुहराया है और उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2030 में कंज्यूमर बिजनेस शुद्ध मुनाफे में आ जाएगी।
तिमाही आधार पर कंपनी का ऑर्डर बुक 9% बढ़कर सितंबर तिमाह के आखिरी में $110 करोड़ पर पहुंच गया, जिन पर पांच से सात साल में काम पूरा करना है। मैनेजमेंट को नियर टर्म में ऑर्डर-बुक से जुड़ा कोई रिस्क नहीं दिख रहा है।
कंपनी का एयरोस्पेस कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 69% पर पहुंच गया और भारतीय कारोबार के मामले में तो यह 76% पर पहुंच गया। एयरोस्पेस इंवेंटरी के वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही तक सामान्य होने की उम्मीद है और कंपनी ने करीब 120 इंवेटरी डेज का लक्ष्य रखा है।
कंपनी ने अब कैपेक्स के ₹600 करोड़ के पहले के अनुमान से कम रहने का अनुमान लगाया है और मैनेजमेंट के मुताबिक पूरे साल में यह ₹500 करोड़ रह सकता है।
कंपनी अपने कैपेक्स का एक बड़ा हिस्सा ऐरोस्पेस की तरफ ले जा रही है और कंपनी का कहना है कि वित्त वर्ष 2028 तक उसके अतिरिक्त पूंजी जुटाने की संभावना कम ही है।
प्रमोटर्स ने प्रेफरेंशियल वारंट्स के जरिए ₹650 करोड़ देने का वादा किया है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।