एनएसई ने चार प्रमुख सूचकांकों के लॉट साइज में कमी की है। यह दिसंबर 2025 के एक्सपायरी साइकिल के बाद लागू हो जाएगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने इसका ऐलान अक्तूबर में किया था। एनएसई ने निफ्टी 50, निफ्टी बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट के लॉट साइज को घटाया है।
चार सूचकांकों के लॉट साइज में कमी
Nifty 50 के लॉट साइज को 75 से घटाकर 65 कर दिया गया है। निफ्टी बैंक के लॉट साइज को 35 से घटाकर 30, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज के 65 से घटाकर 60 और निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट के लाइट साइज को 140 से घटाकर 120 कर दिया गया है। एनएसई ने कहा है कि निफ्टी नेक्स्ट 50 के लॉट साइज में कोई बदलाव नहीं होगा।
ट्रेडर्स के कैपिटल पर सीधा असर पड़ेगा
Vibhavangal Anukulakara के फाउंडर और एमडी सिद्धार्थ मौर्य ने कहा, "निफ्टी, बैंक निफ्टी और दूसरे एनएसई सूचकाकों के लॉट में कमी से कॉन्ट्रैक्ट की नोशनल वैल्यू घट जाएगी। इसका सीधा असर ट्रेडर्स के कैपिटल पर पड़ेगा। निफ्टी के लॉट्स 75 से घटकर 65 और बैंक निफ्टी के 35 से घटकर 30 हो जाने से ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन साइज को एडजस्ट करना पड़ेगा। इसका एफएंडओ सेगमेंट के ट्रेडर्स पर पॉजिटिव असर पड़ेगा।"
सिर्फ मैथ्स बदलेगा, अनुशासन नहीं
एक दूसरे एनालिस्ट ने कहा, "कॉन्ट्रैक्ट्स छोटे होने से मैथ्स बदल जाएगा लेकिन अनुशासन नहीं बदलेगा।" उनका मतलब एफएंडओ ट्रेडिंग में होने वाले उतारचढ़ाव से था, जिसमें पूंजी डूबने का खतरा होता है। सेबी के डेटा के मुताबिक, 90 फीसदी एफएंडओ ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ता है। एनालिस्ट्स का कहना है कि लॉट साइज घटने से लिक्विडिटी बढ़ जाएगी। मार्केट में डेप्थ बढ़ेगा। एग्जिक्यूशन की क्वानटिटी बढ़ जाएगी। लेकिन, इससे रिस्क नहीं घटेगा।
ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन एडजस्ट करनी पड़ेगी
अगले साइकिल से जनवरी 2026 के वीकली और मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स में रिवाज्ड मार्केट्स लॉट्स देखने को मिलेंगे। इससे ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन और मार्जिन रिक्वायरमेंट को एडजस्ट करना होगा। रिटेल इनवेस्टर्स के लिए एफएंडओ ट्रेडिंग में आसानी होगी, क्योंकि उन्हें अब पहले के मुकाबले कम पूंजी की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, ऑप्शन सेलर्स को सावधान रहना पड़ेगा, क्योंकि उनकी ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी।
कॉन्ट्रैक्टक्स ज्यादा ट्रेडर्स के दायरे में आ जाएंगे
एनएसई लॉट साइज घटाकर नोशनल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू फिर से 15 लाख से 17 लाख की रेंज में लाना चाहता है। इससे प्रति प्वाइंट P&L करीब 10-15 फीसदी घट जाएगी। इससे कॉन्ट्रैक्ट्स ज्यादा ट्रेडर्स के दायरे में आ जाएंगे। लेकिन, इसके लिए स्ट्रेटेजिक एडजस्टमेंट करने होंगे। एनालिस्ट्स का कहना है कि ट्रेडर्स को रिस्क और रिटर्न को बैलेंस करने के लिए लॉट की संख्या की जगह अमाउंट के हिसाब से अपनी पोजीशन एडजस्ट करना चाहिए।