Bank Nifty इस फाइनेंशियल ईयर के आखिर तक 50,000 प्वाइंट्स तक पहुंच सकता है। लेकिन, उसके पहले इसमें एक छोटा करेक्शन दिख सकता है। ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi के सीनियर मैनेजर (इक्विटी रिसर्च) जिगर एस पटेल ने यह उम्मीद जताई है। पटेल ने मनीकंट्रोल से बातचीत में स्टॉक मार्केट और इनवेस्टमेंट से जुड़े कई अहम मसलों पर खुलकर चर्चा की। उन्हें टेक्निकल एनालिसिस का 9 साल से ज्यादा अनुभव है। उन्होंने कहा कि Nifty50 20,000 के मनोवैज्ञानिक लेवल को पार कर गया है। यह लगातार तीसरे हफ्ते हरे निशान में बंद हुआ। 20,000-19,200 की रेंज में कंसॉलिडेशन के बाद आखिरकार निफ्टी ने ब्रेकआउट दिखाया है।
निफ्टी50 के लिए 20,600 अगला टारगेट
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में निफ्टी के लिए 20,600 का लेवल नेक्स्ट टारगेट होगा। लेकिन, इससे पहले इसे 20,400 पर रेसिस्टेंस का समाना करना पड़ेगा। इसे पार करने के बाद निफ्टी 20,600 की तरफ बढ़ेगा। गिरावट की स्थिति में 20,000-19,000 पर सपोर्ट दिख रहा है। फिलहाल, ट्रेडर्स को खास शेयरों पर फोकस करना चाहिए। उन्हें ट्रेड में स्टॉलॉस जरूर लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि Nifty It में तेजी का ट्रेंड शुरू हो चुका है। आईटी स्टॉक्स अच्छे दिख रहे हैं। आईटी इंडेक्स अप्रैल 2023 में 26,028 के लेवल पर पहुंच गया था। आने वाले हफ्तों में इसकी रेज 32,000-35,000 हो सकती है।
बैंक निफ्टी में दिखेगी तेजी
Bank Nifty के बारे में पूछने पर पटेल ने कहा कि इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक इसके 50,000 तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन, इससे पहले इसमें स्मॉल करेक्शन दिख सकता है। अभी बैंक निफ्टी अपने मंथली सेंट्रल Pivot Ragne से ऊपर है। FMCG Index के बारे में उन्होंने कहा कि इसकी तस्वीर साफ नहीं दिख रही है। इसकी वजह यह है कि जुलाई 2023 में इसने शूटिंग स्टार पैटर्न बनाया था। इसके बाद इसमें बेयरिश इनगल्फिंग कैंडलस्टिक पैटर्न देखने को मिला। हालांकि, डेली चार्ट पर यह अपने मंथली सेंट्रल पिवोट रेंज से ऊपर बना रहा है। अगर निफ्टी एफएमसीज 51,000 से नीचे बंद होता है तो हमें इसमें करेक्शन दिख सकता है। इसमें यह गिरकर 50,000 तक आ सकता है।
निवेशकों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
ट्रेड का फैसला लेने से पहले निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी व्यापक रिसर्च और एनालिसिस जरूरी है। इससे सही और प्रॉफिटेबल फैसले लेने की संभावना बढ़ जाती है। इसके बाद निवेशक को टेक्निकल एनालिसिस, उतार-चढ़ाव, रिस्क लेने की क्षमता, स्टॉपलॉस, डायवर्सिफिकेशन का ख्याल रखना चाहिए। निवेशक के लिए टाइमफ्रेम तय करना भी जरूरी है। वे शॉर्टटर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म में से किसी एक को नजर में रख ट्रेड का फैसला ले सकता है।