आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में निवेश बढ़ने से कॉपर की मांग बढ़ी है। लेकिन, अगर एआई में निवेश में बड़ी गिरावट आती है तो इसका व्यापक असर पड़ेगा। यह असर सिर्फ कॉपर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इकोनॉमिक ग्रोथ और शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा। एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
कॉपर की ज्यादा डिमांड में डेटा सेंटर्स का बड़ा हाथ
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का कॉपर की बढ़ती डिमांड में बड़ा हाथ रहा है। इससे पहले कॉपर की ज्यादा डिमांड पावर जेनरेशन और ट्रांसमिशन सेक्टर से आती थी। इस साल डेटा सेंटर्स में करीब 10 लाख टन कॉपर के इस्तेमाल की उम्मीद है। डेटा सेंटर्स की वजह से स्टील, एल्युमीनियम और लेड की डिमांड भी बढ़ी है।
2030 तक बिजली की डिमांड सप्लाई से ज्यादा रह सकती है
डेटा सेंटर्स की ग्रोथ को आगे बिजली की कमी का सामना करना पड़ सकता है। 2030 तक डेटा सेंटर्स की बिजली की डिमांड और सप्लाई के बीच 50 गीगावॉट का फर्क हो सकता है। हालांकि, AI में निवेश तेजी से घटने पर न सिर्फ कॉपर की डिमांड पर असर पड़ेगा बल्कि कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी, इकोनॉमिक ग्रोथ और शेयर बाजारों पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
अमेरिका में रिफाइंड कॉपर की 9 लाख टन की खपत
एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के बीच अमेरिका में रिफाइंड कॉपर की खपत करीब 9 लाख टन की रही। इससे दूसरे देशों को कॉपर की सप्लाई पर दबाव बना। कॉपर माइनिंग में निवेश और रिफाइनिंग कपैसिटी पर पर चीन का काफी असर रहा है। ऐसे में एक्सपोर्ट कंट्रोल्स, प्रोडक्शन कोटा और ट्रेड रेस्ट्रिक्शंस का असर कीमतों, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी से जुड़े डेवलपमेंट पर पड़ सकता है।
नए माइंस कम डेवलप हो रहे, जबकि स्मेल्टर की कपैसिटी बढ़ रही
इस रिपोर्ट के मुताबिक, स्मेल्टिंग कपैसिटी तेजी से बढ़ रही है, जबकि कॉपर के माइंस को डेवलप करने की रफ्तार उतनी तेज नहीं है। इससे कॉपर को लेकर प्रतियोगिता बढ़ रही है। चीन में स्पॉट ट्रीटमेंट चार्ज गिरकर 240 डॉलर प्रति टन पर आ गया है। इससे चीन में स्मेल्टर को प्रति ड्राई टन पर 140 डॉलर का नुकसान हो रहा है। दुनियाभर में जेनरेटिव एआई में निवेश बढ़ने से डेटा सेंटर्स के कंस्ट्रक्शन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ी हैं। ग्लोबल डेटा सेंटर इंडस्ट्री 11 फीसदी सीएजीआर से बढ़ रही है।