एक्सिस एसेट मैनेजमेंट कंपनी अब ऊंची उड़ान भरने को तैयार है। बीते दो साल कंपनी के लिए काफी मुश्किल रहे। कंपनी पर डीलर की गतिविधियों पर नजर नहीं रखने के आरोप लगे। इससे ट्रेड में फ्रंट-रनिंग जैसे मामले सामने आए। कंपनी को कई एंप्लॉयीज के खिलाफ एक्शन लेना पड़ा। इसका असर म्यूचुअल फंड कंपनी की साख पर पड़ा। सीईओ और एमडी बी गोपकुमार ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कंपनी के प्लान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी अब संकट से बाहर आ चुकी है।
गोपकुमार ने 2023 में संभाली थी जिम्मेदारी
गोपकुमार ने कहा, "मैंने अप्रैल 2023 में एक्सिस एएमसी को ज्वाइन किया था। तब से मेरा लक्ष्य रिस्क मैनेजमेंट में अनुशासन के साथ बेहतर प्रदर्शन रहा है। इनवेस्टमेंट में जिम्मेदारी के साथ हमने स्टेकहोल्डर्स के साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाने की कोशिश की।" उन्होंने कहा कि कंपनी ने सेबी के साथ सेटलमेंट किया। सेबी के 1996 के एमएफ रेगुलेशन के तहत कोई कंपनी गलती स्वीकार या इनकार किए बगैर सेटलमेंट कर सकती है। इससे रेगुलेटर से जुड़े मसले बंद हो जाते हैं।
टीम में 20 साल से ज्यादा अनुभव वाले प्रोफेशनल्स
उन्होंने कहा कि टीम को मजबूत बनाने के लिए रिस्क, कंप्लायंस और लीगल के लिए अलग-अलग हेड की नियुक्ति की गई है। कंपनी ने नए चीफ ऑपरेटिंग अफसर को नियुक्त किया है। इससे कंपनी के पास ऐसे प्रोफेशनल्स हैं, जिनके पास 20 सालों का अनुभव है। कंपनी में इक्विटी से जुड़े 9 फंड मैनेजर्स हैं और 16 एनालिस्ट्स हैं। फिक्स्ड इनकम का प्रदर्शन अच्छा है। फिक्स्ड इनकम के लिए 8 फंड मैनेजर्स और पांच एनालिस्ट्स हैं।
कंपनी ने डायवर्सिफिकेशन पर बढ़ाया फोकस
एक्सिस एएमसी के सीईओ ने बताया कि पहले हमारा जोर कंस्ट्रेटेड पोर्टफोलियो के मैनेजमेंट पर होता था। अब हम डायवर्सिफिकेशन पर फोकस कर रहे हैं। उदाहरण के लिए हमारी ईएलएसएस स्कीम में पहले टॉप 10 शेयरों की टोटल नेट एसेट्स में करीब 65 फीसदी हिस्सेदारी होती थी। अब यह करीब 40 फीसदी है। इनवेस्टमेंट का हमारा स्टाइल पहले की तरह है, लेकिन हमने डायवर्सिफिकेशन बढ़ा दिया है। हमारा ईएलएसएस फंड काफी बड़ा है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेटं 35,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न की अनदेखी ठीक नहीं
उन्होंने कहा कि आज ज्यादातर इनवेस्टर्स रिटर्न पर फोकस करते हैं। वे रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न की अनदेखी करते हैं। शॉर्ट रेशियो, बीटा और स्टॉक्स की वैल्यूएशन और क्वालिटी के बारे में इनवेस्टर्स को नहीं बताया जाता है। हम ऐप में रिस्क मीट्रिक्स और एडवान्स्ड एनालिटिक्स को शामिल कर इस कमी को दूर करना चाहते हैं। इससे इनवेस्टर सोचसमझकर फैसला ले सकेगा।