Bank Nifty 1.7% टूटा, HDFC और ICICI Bank में सबसे ज़्यादा गिरावट, जाने अब क्या हो रणनीति

Bank Nifty trend : ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 100 डॉलर के आसपास होने के कारण बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ रहा है। इस बात की आशंका है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें उधार लेने की लागत बढ़ा सकती हैं,बॉन्ड यील्ड को ऊपर धकेल सकती हैं और ट्रेजरी गेन को कम कर सकती हैं

अपडेटेड Mar 13, 2026 पर 1:18 PM
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Bank Nifty Trend : SAMCO Securities के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट,धुपेश धमेजा का कहना है कि बैंक निफ्टी का व्यापक ढांचा लगातार 'लोअर-हाई'पैटर्न दिखा रहा है,जिससे पता चलता है कि हर उछाल पर नई बिकवाली का दबाव बन रहा है

Bank Nifty Trend :13 मार्च को फाइनेंशियल शेयरों पर भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है। बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज HDFC Bank और ICICI Bank सबसे ज़्यादा नुकसान में नजर आ रहे हैं। सुबह 10:30 बजे के आसपास बैंक निफ्टी इंडेक्स 1.75% की गिरावट के साथ 54,000 के स्तर के करीब ट्रेड कर रहा था। इसमें HDFC Bank और ICICI Bank सबसे ज़्यादा नुकसान में थे। इन शेयरों में 2.19% और 1.28% की कमजोरी देखने को मिल रही थी। इस सेक्टोरल इंडेक्स के सभी शेयर लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे।

PSU बैंकों में, State Bank of India सबसे ज़्यादा नुकसान में रहा है,जिसमें 2% से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इंडेक्स के लिए सपोर्ट 54,000–54,200 पर है। चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने कहा कि 26.71 पर RSI भी ओवरसोल्ड पोजीशन के करीब होने का संकेत दे रहा है।

ब्रेंट क्रूड के लगभग 100 डॉलर पर होने से बैंकिंग शेयरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह यह डर है कि क्रूड की कीमतें बढ़ने से उधार लेने की लागत बढ़ सकती है,बॉन्ड यील्ड ऊपर जा सकती है और ट्रेजरी से होने वाला मुनाफ़ा कम हो सकता है।


13 मार्च को बेंचमार्क 10-ईयर बॉन्ड 98.6275 रुपये पर कोट कर रहा जिसकी यील्ड थोड़ी बढ़कर 6.6758% हो गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और US ट्रेजरी यील्ड में और बढ़ोतरी हुई है।

भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर

शुक्रवार को भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गया। इसकी वजह यह चिंता है कि तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहने से भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ जाएंगे। मध्य-पूर्व में युद्ध जारी है,जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मची हुई है। रुपया गिरकर 92.39 रुपए प्रति डॉलर के आसपास पहुंच गया है। यह पिछले सत्र में दर्ज अपने पिछले ऑलटाइम लो लेवल 92.3575 को भी पीछे छोड़ दिया है।

अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपए में 1% से अधिक की गिरावट आई है, लेकिन भारतीय रिज़र्व बैंक के बाज़ार हस्तक्षेपों के कारण इसने अपने कुछ उभरते बाज़ार के समकक्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।

शॉर्ट टर्म का रुझान अभी भी बिकवाली करने वालों के पक्ष में

SAMCO Securities के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट, धुपेश धमेजा का कहना है कि बैंक निफ्टी का व्यापक ढांचा लगातार 'लोअर-हाई' (lower-high) पैटर्न दिखा रहा है,जिससे पता चलता है कि हर उछाल पर नई बिकवाली का दबाव बन रहा है। तकनीकी रूप से,यह इंडेक्स अपने 10-DEMA से नीचे ट्रेड कर रहा है,जो मौजूदा मंदी के रुझान को और मज़बूत करता है। वहीं,डेली और ऑवरली दोनों चार्ट पर RSI 'ओवरसोल्ड' (oversold) ज़ोन में फिसल गया है,जिससे यह संकेत मिलता है कि बीच-बीच में आने वाले छोटे-मोटे सुधारों की संभावना के बावजूद,बाज़ार का मोमेंटम कमज़ोर बना हुआ है। ऑवरली टाइमफ्रेम पर, बैंक निफ्टी 20-EMA, 50-EMA और सुपर ट्रेंड (Super trend) से नीचे बना हुआ है,जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि शॉर्ट टर्म का रुझान अभी भी बिकवाली करने वालों के पक्ष में है।

 

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