भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए शुक्रवार का दिन 'लहूलुहान' कर देने वाला था। निवेशकों के करीब 7 लाख करोड़ रुपये सिर्फ एक दिन में शेयर बाजार में डूब गए। शेयर बाजारों में करीब 3 पर्सेंट की गिरावट आई, जिसमें BSE सेंसेक्स 1,687.9 अंक गिर गया। वहीं निफ्टी करीब 509.8 अंक टूटा।
सेसेंक्स में यह इस साल की तीसरी सबसे बड़ी गिरावट है। सेंसेक्स में साल 2021 में सबसे बड़ी गिरावट 26 फरवरी को आई थी, जब सेंसेक्स करीब 1,939 अंक गिरा था। इसके बाद 12 अप्रैल में सेंसेक्स करीब 1,707 अंक गिरा था, जो इस साल की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। इसके बाद सेंसेक्स में सबसे बड़ी गिरावट आज यानी शुक्रवार 26 नवंबर को 1,687 अंकों की आई है।
इस तरह से देखें तो पिछले 7 महीनों में यह सेंसेंक्स में आई सबसे बड़ी गिरावट है। सेंसेक्ट ने पिछले महीने 19 अक्टूबर को 62,245 अंक का अपना अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छुआ था। इसके बाद से ही शेयर बाजार में अस्थिरता का दौर शुरू हुआ है और इसमें बाद से इसमें करीब 9 पर्सेंट की गिरावट देखी जा चुकी है।
जानकारों के मुताबिक पिछले एक महीने में आई इस तेज गिरावट के पीछे, विदेशी निवेशकों (FII) की तरफ से लगातार बिकवाली, ग्लोबल मार्केट में कमजोरी और वैल्यूएशन का मंहगा होना है। इसके अलावा शुक्रवार को आए भारी गिरावट के पीछे कोरोना वायरस के मिले नए वैरिंएंट को वजह बताया जा रहा है, जिसकी वजह से निवेशकों में एक तरह से दहशत का माहौल है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) में रिटेल रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा, “जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि कोरोना का नया वैरिएंट कितना खतरनाक हो सकता है, तब तक बाजार के दबाव में बने रहने की संभावना है।”
खेमका ने कहा, "बाजार पहले से ही इस दबाव में है कि फेड रिजर्व कभी भी ब्याज गर बढ़ा सकता है। इस बीच कोरोना वायरस का नए वैरिएंट मिलना और यूरीपीय यूनियन के कई देशों की तरफ से साउथ अफ्रीका से आने-जाने वाली उड़ानों पर बैन लगाना और कुछ यूरीपीय देशों में पहले से ही लॉकडाउन की स्थिति से निवेशकों के सेंटीमेंट को एक बड़ा झटका लगा है।