Nifty Target: शेयर बाजार को एक और झटका, अब BNP पारिबा ने 11% घटाया निफ्टी का टारगेट

Nifty 2026 Target: ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बीएनपी पारिबा (BNP Paribas) ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर अपना रुख सतर्क कर लिया है। कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल के बाद ब्रोकरेज ने 2026 के लिए निफ्टी (Nifty) का टारगेट 11 प्रतिशत घटाकर 25,500 कर दिया है

अपडेटेड Apr 14, 2026 पर 3:11 PM
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Nifty 2026 Target: ब्रोकरेज के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख अभी भी कमजोर बना हुआ है

Nifty 2026 Target: ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बीएनपी पारिबा (BNP Paribas) ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर अपना रुख सतर्क कर लिया है। कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल के बाद ब्रोकरेज ने 2026 के लिए निफ्टी (Nifty) का टारगेट 11 प्रतिशत घटाकर 25,500 कर दिया है। बता दें कि इससे पहले गोल्डमैन सैक्स और नोमुरा ने भी 2026 के लिए निफ्टी के टारगेट में कटौती की थी।

बीएनपी पारिबा ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर अर्निंग्स का आउटलुक और विदेशी निवेशकों की सुस्ती बाजार की तेजी को सीमित कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते तेल की कीमतों में आई तेजी के बाद शेयर मार्केट को लेकर उम्मीदें अब पहले से काफी हद तक कम हो गई हैं।

तेल $85-90 के दायरे में रहा तो बढ़ेगा दबाव

BNP पारिबा के मुताबिक, अगर कच्चे तेल का भाव 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना रहता है, तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। इससे कंपनियों की अर्निंग्स प्रभावित होगी और रिकवरी की उम्मीदें भी टल सकती हैं।


रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा अनुमान अभी तक ऊंची लागत और कमजोर मांग के पूरे असर को नहीं दिखाते। पिछली बार के तेल झटकों की तरह इस बार भी अलग-अलग सेक्टर में कमाई के अनुमान घटाए जा सकते हैं।

इनपुट कॉस्ट बढ़ने, महंगाई के दबाव और मांग में कमजोरी से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से वैल्यूएशन में तेजी सीमित रहने की संभावना है।

FII निवेशक सतर्क, AI भी बना लॉन्ग-टर्म चुनौती

ब्रोकरेज के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख अभी भी कमजोर बना हुआ है। ग्लोबल बाजारों मे AI-आधरित तेजी में भारत पीछे रह गया है और कमाई की रफ्तार भी धीमी है, जिससे निवेशकों का उत्साह कम हुआ है।

इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर सर्विस सेक्टर की नौकरियों और खपत पर भी पड़ सकता है, जो लंबी अवधि में एक नई चुनौती बन सकता है।

मैक्रो पर भी बढ़ा जोखिम

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का चालू खाता घाटा (CAD) करीब 35 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकता है।

इसके अलावा, अगर सरकार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी घटाती है, तो सालाना करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू नुकसान हो सकता है। इससे सरकार को कैपेक्स खर्च में कटौती करनी पड़ सकती है, जो आर्थिक ग्रोथ के लिए नकारात्मक होगा।

कौन-से सेक्टर पसंद, किनसे दूरी?

BNP पारिबा ने अपनी सेक्टर रणनीति में बदलाव करते हुए डिफेंसिव सेक्टर्स को प्राथमिकता दी है। ब्रोकरेज को FMCG, टेलीकॉम और यूटिलिटी सेक्टर पसंद हैं, क्योंकि इनमें स्थिर कमाई और प्राइसिंग पावर होती है।

इसके अलावा, हालिया गिरावट के बाद प्राइवेट बैंकों में बेहतर अवसर दिखाई दे रहा है, जबकि IT सेक्टर में वैल्यूएशन सुधार और रुपये की कमजोरी से मार्जिन सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, ऑटो, सीमेंट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर पर ब्रोकरेज ने अंडरवेट रेटिंग दी है, क्योंकि ये सेक्टर बढ़ती लागत से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को भी जोखिम भरा बताया गया है, क्योंकि कैपेक्स में संभावित कटौती का असर पड़ सकता है।

फार्मा सेक्टर पर ब्रोकरेज ने न्यूट्रल रुख रखा है। कमाई स्थिर है, लेकिन लागत का दबाव बना हुआ है।

रेंज-बाउंड रह सकता है बाजार

हालांकि बाजार के वैल्यूएशन में सुधार हुआ है और इसमें कंपनियों की अर्निंग्स में आई कुछ गिरावट भी शामिल हो चुकी है, लेकिन BNP पारिबा का मानना है कि इसमें बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। इसकी वजह बढ़ती बॉन्ड यील्ड, कमजोर निवेश फ्लो और बाजार में लगातार नए शेयरों की सप्लाई है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, मौजूदा स्तरों से निफ्टी-50 में सिर्फ करीब 7% की ही बढ़त की संभावना है। इसका मतलब है कि 2026 के बाकी समय में बाजार सीमित दायरे यानी रेंज-बाउंड में रह सकता है।

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