कमोडिटी की कीमतों में उछाल के साथ ही महंगाई बढ़ने और ग्रोथ थमने के डर के चलते बाजार में आज भारी गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतें 13 साल के हाई पर पहुंच गई हैं। जिसके चलते बाजार आज बुरी तरह से लड़खड़ा गया। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया भी आज 77 रुपये के अपने ऑल टाईम लो पर पहुंच गया। आज लगातार बाजार में पांचवे दिन गिरावट देखने को मिली। बाजार के लिए आज का दिन ब्लैक मंडे रहा। निफ्टी 7 महीने के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। आज के कारोबार में बैंकिंग, फाइनेंशियल, ऑटो, एफएमसीजी और इंडेक्स हैवी वेट रिलायंस में भारी गिरावट देखने को मिली है।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1491.06 अंक यानी 2.74 फीसदी की गिरावट के साथ 52,842.75 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 382.20 अंक यानी 2.35 फीसदी टूटकर 15,863.15 के स्तर पर बंद हुआ।
आज की गिरावट में एक ही दिन में निवेशकों के 5.68 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए और बीएसई की मार्केट कैप पिछले शुक्रवार के 246.8 लाख करोड़ रुपये से घटकर 241.1 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। अगर हम फरवरी के शुरुआत से अब तक की गिरावट पर नजर डालें तो अब तक बाजार में 29 लाख करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। इस दौरान बाजार अक्टूबर 2021 के अपने हाई से करीब 15 फीसदी टूट चुका है।
जानिए मंगलवार को कैसी रह सकती है बाजार की चाल
ICICIdirect के पकंज पांडे का कहना है कि रशिया और यूक्रेन के बीच लगातार गंभीर होती स्थिति के साथ ही ग्लोबल और भारतीय दोनों बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इससे भारत के चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही देश का वित्तीय घाटा भी बढ़ेगा क्योंकि भारत अपनी तेल की जरुरत का 80 फीसदी आयात करता है।
इक्विटी मार्केट के आउटलुक पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नियरटर्म में बाजार में वोलैटिलिटी बनी रहेगी। लेकिन बाजार में आई हालिया गिरावट अच्छे शेयरों में निवेश के नजरिए से खरीदारी का अच्छा मौका है। नियर टर्म में मेटल, आईटी, फार्मा मजबूती दिखा सकते हैं। वही मीडियम टर्म में कैपिटल गुड्स और पीएलआई योजना से जुड़े स्टॉक बेहतर प्रदर्शन करते नजर आ सकते हैं।
Religare Broking के अजित मिश्रा का कहना है कि बाजार क्रूड ऑयल में आई तेजी और रूस पर और प्रतिबंध लगने की संभावना के बीच दबाव में नजर आ रहे हैं। चूंकि रूस और यूक्रेन के संघर्ष में तनाव घटने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। बाजार भागीदारों को सलाह होगी कि वह ग्लोबल मार्केट के संकेतों पर नजर बनाए रखें। घरेलू बाजार की बात करें तो राज्यों के चुनावों के एक्जिट पोल और 10 मार्च को आने वाले चुनावी नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।