ब्रेंट क्रूड लगातार छठे दिन चढ़ा। 28 अप्रैल को यह 111 डॉलर प्रति बैरल के पार कर गया। इसका असर ऑयल कंपनियों पर दिखा। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) और ऑयल इंडिया के शेयरों में तेजी दिखी, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई।

ब्रेंट क्रूड लगातार छठे दिन चढ़ा। 28 अप्रैल को यह 111 डॉलर प्रति बैरल के पार कर गया। इसका असर ऑयल कंपनियों पर दिखा। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) और ऑयल इंडिया के शेयरों में तेजी दिखी, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई।
ओएनजीसी का शेयर 6 फीसदी उछला
ONGC और Oil India क्रूड ऑयल का एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन करती हैं। इन्हें ऑयल की कीमतों में उछाल से फायदा होता है। इसस इन कंपनियों की इनकम बढ़ती है। ONGC का शेयर 28 अप्रैल को 5.63 फीसदी चढ़कर 302 रुपये पर बंद हुआ। Oil India का शेयर 4.49 फीसदी चढ़कर 497.60 रुपये पर क्लोज हुआ।
सरकारी OMC के शेयर फिसले
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का शेयर 0.36 फीसदी गिरकर 145.74 रुपये पर बंद हुआ। सुबह में यह शेयर कमजोर खुला। फिर पूरे दिन में इसमें कमजोरी बनी रही। हालांकि, बंद होने से पहले इसमें कुछ रिकवरी दिखी। HPCL का शेयर 0.24 फीसदी की कमजोरी के साथ 380 रुपये पर क्लोज हुआ। BPCL का शेयर 1.36 फीसदी की कमजोरी के साथ 308.40 रुपये पर बंद हुआ।
7 अप्रैल के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर के पार
ब्रेंट क्रूड की कीमत 7 अप्रैल, 2026 के बाद पहली बार 111 डॉलर के पार हुई है। यह भारत सहित पूरी दुनिया के लिए अच्छी खबर नहीं है। खासकर महंगे क्रूड का भारत पर ज्यादा असर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि भारत अपनी 90 फीसदी ऑयल की जरूरत क्रूड के इंपोर्ट से पूरा करता है।
अमेरिका-ईरान की लड़ाई से क्रूड की कीमतें आसमान में
मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। ईरान और अमेरिका की लड़ाई 28 मार्च को शुरू हुई थी। उसके बाद एक समय क्रूड का भाव 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। उसके बाद उसमें थोड़ी नरमी आई। अब यह फिर से 111 डॉलर के पार हो गया है।
सरकारी तेल कंपनियों ने नहीं बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के भाव
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने क्रूड में उछाल के बावजूद अब तक नॉमर्ल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बनी बढ़ाई है। कॉस्ट से कम पर पेट्रोल और डीजल बेचने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। अनुमान है कि पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को अंतिम चरण के चुनाव खत्म होने के बाद सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं।
शेयर बाजार में 18 अप्रैल को आई तेजी
शेयर बाजारों में 28 अप्रैल को गिरावट आई। निफ्टी 0.40 फीसदी यानी 97 अंक गिरकर 24,000 से नीचे बंद हुआ। सेंसेक्स 0.54 फीसदी यानी 416 अंक की कमजोरी के साथ 76,886 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.54 फीसदी की गिरावट आई। इसकी वजह प्रोविजनिंग को लेकर आरबीआई के नए नियम हैं, जो अगले साल 1 अप्रैल से लागू होंगे।
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