Brent Crude की कीमतों में लगी आग, 115 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

जून डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.5 फीसदी उछलकर 115.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3.7 फीसदी उछाल के साथ 103.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। क्रूड की बढ़ती कीमतें भारत में सरकार की चिंता बढ़ा सकती हैं। क्रूड पिछले दो महीनों में करीब 50 फीसदी चढ़ा है

अपडेटेड Apr 29, 2026 पर 4:24 PM
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क्रूड ऑयल में 3 फीसदी से ज्यादा तेजी का असर 29 अप्रैल को सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर दिखा।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 29 अप्रैल को बड़ी तेजी आई। जून डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.5 फीसदी उछलकर 115.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3.7 फीसदी उछाल के साथ 103.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान में दूसरे दौर की बातचीत में हो रही देर है। दोनों देशों की लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड 49 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है।

अमेरिका बढ़ा सकता है नाकेबंदी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड में अचानक उछाल की वजह कुछ खबरें हैं। इन खबरों में कहा गया है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी बढ़ाने पर विचार कर रहा है। ऐसा होने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल की सप्लाई नहीं हो पाएगी। इससे भारत सहित दुनियाभर में ऑयल की कमी पैदा हो सकती है। इस वजह से क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल दिख रहा है।


ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करेगा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहते हैं। उनकी स्ट्रेटेजी ईरान से ऑयल की सप्लाई रोकने की है। ऐसा होने पर ईरान की इनकम का सबसे बड़ा स्रोत बंद हो जाएगा। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह खबर 28 अप्रैल को दी है। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे बातचीत की फिलहाल संभावना नहीं दिख रही है।

UAE के OPEC से अलग होने का असर

इस बीच, दुनिया के बड़े बैंकों में एस एक ING के स्ट्रेटेजिस्ट्स ने 29 अप्रैल को अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि OPEC से बाहर होने के UAE के फैसले से इस तेल उत्पादक देशों के संगठन को बड़ा धक्का लगा है। हालांकि, इस खबर का ट्रंप स्वागत करेंगे, क्योंकि इससे ऑयल मार्केट में ओपेक का प्रभाव घटेगा। हालांकि, यह ऑयल के एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स दोनों के लिए अच्छा है।

सरकारी तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान 

क्रूड की बढ़ती कीमतें भारत में सरकार की चिंता बढ़ा सकती हैं। क्रूड पिछले दो महीनों में करीब 50 फीसदी चढ़ा है। इसके बावजूद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई है। इससे सरकारी तेल कंपनियों को कॉस्ट से कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेचने से भारी नुकसान हो रहा है।

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ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयर फिसले

क्रूड ऑयल में 3 फीसदी से ज्यादा तेजी का असर 29 अप्रैल को सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर दिखा। बाजार बंद होने के ठीक पहले IOC का शेयर 0.80 फीसदी गिरकर 144 रुपये पर चल रहा था। HPCL का शेयर 0.14 फीसदी की मामूली तेजी के साथ 380 रुपये चल रहा था। एचपीसीएल का शेयर 1.15 फीसदी की कमजोरी के साथ 304 रुपये पर चल रहा था।

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