Share Markets: मार्च में बड़ी गिरावट के बाद सस्ते मिल रहे शेयर, क्या यह निवेश का सही वक्त है?

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, Nifty 50 में अभी एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग्स के 19.3 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। यह कोरिया के 8.3 गुना और हांगकांग के 11.6 गुना से काफी ज्यादा है। इसका मतलब है भारतीय बाजार अब भी महंगे हैं

अपडेटेड Apr 29, 2026 पर 2:00 PM
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पश्चिम एशिया में लड़ाई का काफी असर शेयर बाजार पर पड़ा है।

शेयर बाजार में इस साल आई गिरावट की वजह वैल्यूएशन घटी है। खासकर पश्चिम एशिया में लड़ाई का काफी असर शेयर बाजार पर पड़ा है। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर सस्ते भाव पर मिल रहे हैं। सवाल है क्या यह शेयर बाजार में एंट्री का समय है? कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट की मानें तो बड़ी गिरावट से वैल्यूएशंस घटने के बावजूद बाजार अभी उतना सस्ता नहीं है कि निवेश किया जाए।

भारतीय बाजार अब भी कोरिया और ताइवान से महंगा

कोटक की रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्निंग्स आउटलुक और वैल्यूएशंस अब भी दूसरे बाजारों के मुकाबले अट्रैक्टिव नहीं हैं। FY26 और FY27 में कोरिया, ताइवान, इंडोनेशिया और ब्राजील की अर्निंग्स ग्रोथ काफी कम वैल्यूएशंस पर स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद है। Nifty 50 में अभी एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग्स के 19.3 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। यह कोरिया के 8.3 गुना और हांगकांग के 11.6 गुना से काफी ज्यादा है। इससे लंबी अवधि में ग्रोथ की अच्छी संभावना के बावजूद भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों के लिए अट्रैक्टिव नहीं है।


इंडिया के आउटलुक पर मध्यपूर्व की लड़ाई का असर 

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल में बाजार में आई तेजी के बाद भारतीय शेयरों की अर्निंग्स यील्ड और 10 साल के सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड के बीच का फर्क काफी तेजी से घटा है। इससे शेयरों के निवेशकों के मार्जिन ऑफ सेफ्टी घटा है। इससे नए रिस्क को देखते हुए मार्केट्स ज्यादा कमजोर लगते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान लड़ाई शुरू होने के बाद से इंडिया का इकोनॉमिक आउटलुक कमजोर हुआ है।

लड़ाई जारी रहने पर कई सेक्टर्स पर पड़ सकता है असर

ज्यादा अनुमान यह है कि अमेरिका-ईरान की लड़ाई कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगी। अगर यह लंबे समय तक चलती है तो इसका इंडिया की इकोनॉमी पर काफी खराब असर पड़ेगा। खासकर क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बने रहने से इंडिया के लिए रिस्क बढ़ जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर से लड़ाई खत्म होने की उम्मीद है। लेकिन, दोनों पक्षों में बातचीत में हो रही देर से चिंता बढ़ी है। अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है तो फिस्कल और मॉनेटरी पॉलिसी के लिए चैलेंजेज बढ़ जाएंगे। इसका असर कई सेक्टर पर पड़ेगा।

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कंजम्प्शन सेक्टर पर पड़ सकता है कमजोर डिमांड का असर

कोटक की रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी 50 इंडेक्स का करीब 50 फीसदी प्रॉफिट यूटिलिटीज, आईटी सर्विसेज, मेटल्स, माइनिंग, फार्मा, ऑयल एंड गैस और टेलीकम्युनिकेशंस से आता है। इन सेक्टर का घरेलू आर्थिक स्थितियों से ज्यादा संबंध नहीं है। करीब एक-तिहाई प्रॉफिट्स बैंकों से आता है, जिस पर लड़ाई का सीमित असर पड़ेगा। बाकी प्रॉफिट कंजम्प्शन सेक्टर से आता है, जिस पर कमजोर डिमांड का असर पड़ सकता है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च तिमाही के नतीजों की शुरुआत अच्छी है। लेकिन आईटी सर्विसेज सेक्टर पर दबाव दिख रहा है।

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