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3 बजे तक कर दें स्क्वेयर ऑफ, इस कारण ब्रोकर्स ने दी रिटेल क्लाइंट्स को सलाह

Closing Auction Session (CAS): एक कारोबारी दिन पहले पहली बार घरेलू मार्केट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू हुआ और मार्केट में ऐसी स्थिति दिखी कि कैश मार्केट में फ्यूचर्स मार्केट से अधिक भाव दिखा। अब कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने रिटेलर्स को 3 बजे तक अपनी पोजिशन बंद करने की सलाह दी है, जानिए ऐसा क्यों

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Aug 04, 2026 पर 11:10 AM
3 बजे तक कर दें स्क्वेयर ऑफ, इस कारण ब्रोकर्स ने दी रिटेल क्लाइंट्स को सलाह
Closing Auction Session (CAS): एक कारोबारी दिन पहले मार्केट में असामान्य स्थिति देखने को मिली। दोपहर 3:15 बजे के बाद कैश मार्केट में भाव फ्यूचर्स मार्केट से अधिक यानी प्रीमियम पर पहुंच गए।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के पहले ही दिन कई ब्रोकर्स ने खुदरा निवेशकों को दोपहर 3 बजे तक अपनी पोजिशन स्क्वेयर ऑफ यानी बंद करने की सलाह दी। सोमवार को नए नियम लागू होने के बाद अहम इंडेक्सेज और कुछ स्टॉक्स में कैश और फ्यूचर्स के भाव के बीच भारी-भरकम गैप देखने को मिला, जिससे मार्केट में कंफ्यूजन की स्थिति बन गई। ब्रोकरेजेज ने अपने क्लाइंट्स को जब तक नए मैकेनिज्म में मार्केट ढल नहीं जाता है, अपनी पोजिशन 3:00 PM और 3:05 PM के बीच बंद करने की सलाह दी है। एक ब्रोकरेज फर्म के टॉप ऑफिशियल ने कहा कि रिटेल क्लाइंट्स को 3 बजे तक अपनी सभी पोजिशन स्क्वेयर ऑफ करने की सलाह दी गई है। उनका कहना है कि फिलहाल मार्केट में काफी अनिश्चितता है और वह नहीं चाहते कि उनके क्लाइंट्स को किसी तरह का नुकसान उठाना पड़े।

क्या है इस सलाह की वजह

ब्रोकरेज की यह सलाह ऐसे समय में आई है, जब एक कारोबारी दिन पहले मार्केट में असामान्य स्थिति देखने को मिली। दोपहर 3:15 बजे के बाद कैश मार्केट में भाव फ्यूचर्स मार्केट से अधिक यानी प्रीमियम पर पहुंच गए। आम दिनों में फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट आमतौर पर स्पॉट प्राइस से अधिक प्रीमियम पर ट्रेड करते हैं, क्योंकि उनमें कॉस्ट ऑफ कैरी शामिल होती है। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह फर्क सिर्फ निफ्टी जैसे अहम इंडेक्सेज में ही नहीं बल्कि इंडिविजुअल स्टॉक्स में भी दिखा। इसकी वजह ये है कि कैश मार्केट में 3 अगस्त को 3:15 बजे के बाद क्लोजिंग ऑक्शन के जरिए कीमत तय हो रही थी, जबकि डेरिवेटिव्स मार्केट में सामान्य कारोबार 3:40 PM तक जारी रहा।

बीसीबी ब्रोकरेज के एमडी Uttam Bagri का कहना है कि दिक्कत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की व्यवस्था में नहीं है, बल्कि इसमें पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने की है। उनका मानना है कि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्थागत निवेशक, आर्बिट्रेज ट्रेडर, लिक्विडिटी प्रोवाइडर इत्यादि क्लोजिंग ऑक्शन में सक्रिय रूप से ऑर्डर डालते हैं या नहीं।

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