Budget expectations : बजट से मार्केट को मिल सकता है शॉर्ट टर्म सपोर्ट, मजबूत अर्निंग और स्टेबल मार्जिन वाले शेयरों पर ही रहे फोकस
Budget expectations : वरुण का मानना है कि बजट में उम्मीद से ज़्यादा कैपेक्स एलोकेशन होने, ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले पॉलिसी उपायों, फिस्कल डेफिसिट के सही लेवल पर रहने और कंज्यूमर्स के लिए इनकम टैक्स पर अनुकूल रुख होने से शॉर्ट टर्म के लिए मार्केट सेंटिमेंट सुधर सकता है
Market Outlook : वरुण लोहचब का कहना है कि हालिया कंसोलिडेशन के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट के कई पॉकेट्स में तेज़ी कम हुई है, इसके बावजूद इनका कुल वैल्यूएशन अभी भी ज़्यादा हैं। ऐसे में हमें मिडकैप और स्मॉलकैप में इन्वेस्ट करते समय सेलेक्टिव रहना चाहिए
Budget expectations : बाजार की आगे की दशा और दिशा पर बात करते हुए HDFC सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के हेड वरुण लोहचब ने कहा कि आगामी बजट मार्केट सेंटिमेंट को बेहतर बनाने में कुछ मदद कर सकता है। हाल ही में नया रिकॉर्ड हाई बनाने के बावजूद, मार्केट एक साल में ज़्यादा समय तक काफी हद तक रेंज-बाउंड ही रहा है। पिछले साल Nifty हल्की अर्निंग ग्रोथ और लिमिटेड वैल्यूएशन अपसाइड की वजह से रेंज-बाउंड रहा है। वरुण का मानना है कि बजट में उम्मीद से ज़्यादा कैपेक्स एलोकेशन होने, ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले पॉलिसी उपायों, फिस्कल डेफिसिट के सही लेवल पर रहने और कंज्यूमर्स के लिए इनकम टैक्स पर अनुकूल रुख होने से शॉर्ट टर्म के लिए मार्केट सेंटिमेंट सुधर सकता है।
हालांकि, उनका मानना है कि कोई भी टिकाऊ मीडियम-टर्म मज़बूती अभी भी FY27 में कॉर्पोरेट इंडिया की अर्निंग ग्रोथ पर निर्भर करेगी। उनके आकलन के मुताबिक, Nifty से FY26 में हाई सिंगल से लो डबल-डिजिट अर्निंग ग्रोथ देने की उम्मीद है। वहीं, FY27 में 12%+ ग्रोथ का अनुमान है। यह अर्निंग डिलीवरी अगले साल Nifty में 5 से 10% के अपसाइड की संभावना दिखाती है।
तिमाही प्रोविजनल बिज़नेस अपडेट्स और हाल के Q3 नंबर्स को देखने के बाद, क्या आपको एक मज़बूत Q3 नतीजों के सीज़न का भरोसा है?
उम्मीद है कि पिछले क्वार्टर की तरह Q3FY26 के नतीजे भी ठीक-ठाक रहेंगे। लेकिन कुल मिलाकर बहुत मज़बूत ग्रोथी की उम्मीद नहीं है। हालांकि कुछ सेक्टर (जैसे IT और कंज्यूमर) में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। सेक्टर एनालिसिस से पता चलता है कि Q3 FY26 में मेटल्स और फाइनेंशियल सेक्टर अच्छा परफॉर्मेंस दे सकते हैं। इसके उलट, कंजम्पशन और IT सेक्टर से इस तिमाही में कमजोर नतीजों की उम्मीद है। लेकिन ऐसा लगता है कि वे अब बॉटम आउट हो रहे हैं। नतीजतन, इन सेक्टरों से FY27 में अपेक्षाकृत बेहतर परफॉर्मेंस और कुल अर्निंग की बढ़ोतरी में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
क्या आपको लगता है कि सोने की बढ़ती कीमतें भारत की बैलेंस शीट को बेहतर बना रही हैं?
सोने की ऊंची कीमतों ने रीवैल्यूएशन गेन के कारण RBI की बैलेंस शीट को सपोर्ट किया है और ग्लोबल अस्थिरता के खिलाफ एक बफर का काम किया है। साल 2025 में भारत के सोने के भंडार का मूल्य 100 अरब डॉलर को पार कर गया,जो एक मजबूत फॉरेक्स रिज़र्व डाइवर्सिफिकेशन टूल है। भारत के फॉरेक्स रिज़र्व में सोने का हिस्सा जनवरी 2026 में बढ़कर 16 फीसदी से ज्यादा हो गया है,जबकि वित्त वर्ष 2023 के आखिर तक यह 8 फीसदी था।
हालांकि, सोने की बढ़ती कीमतों से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) में रिडेम्पशन की संभावना बढ़ गई है, जिससे सरकार की देनदारियां बढ़ गई हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि बढ़ती देनदारियों के बावजूद, SGBs ने भारत में फिजिकल सोने के आयात को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे देश के चालू खाता घाटे को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। संक्षेप में, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि SGB रिडेम्पशन की देनदारियों के बढ़ाने के बावजूद, सोने की बढ़ती कीमतों ने भारत की बैलेंस शीट को मजबूत करने में योगदान दिया है।
मौजूदा मार्केट ट्रेंड्स के आधार पर, क्या आपको लगता है कि हम अभी भी मुश्किल से बाहर नहीं निकले हैं? कौन से फैक्टर्स इक्विटी मार्केट में तेज़ी ला सकते हैं?
फिलहाल मार्केट एक बड़े लेवलर की तरह काम कर रहा है। जहां भी अच्छी अर्निंग के सपोर्ट के बिना वैल्यूएशन में तेज़ी है,वहां करेक्शन हो रहा है। साथ ही,मज़बूत अर्निंग वाले स्टॉक्स में बढ़ोतरी हो रही है और वे इन्वेस्टर्स का पैसा आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे में मीडियम टर्म में मार्केट के अर्निंग पर आधारित रहने की उम्मीद है।
ज़्यादा वैल्यूएशन के साथ अर्निंग में कमजोरी वाले शेयरों को नुकसान होगा, जबकि मज़बूत अर्निंग वाले शेयरों को अच्छा इनाम मिलेगा। इसका मतलब है कि मज़बूत कमाई में वाले स्टॉक्स में तेज़ी आ सकती है। इस स्थिति में, बॉटम-अप स्टॉक पिकिंग इन्वेस्ट करना सबसे समझदारी वाला तरीका हो सकता है। इंडेक्स आधारित या सेक्टर अप्रोच से इन्वेस्ट करने पर कोई खास फायदा नहीं होगा।
क्या आपको लगता है कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद ही तेजी पकड़ेंगे?
हालिया कंसोलिडेशन के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट के कई पॉकेट्स में तेज़ी कम हुई है, इसके बावजूद इनका कुल वैल्यूएशन अभी भी ज़्यादा हैं। ऐसे में हमें SMID स्पेस (मिडकैप और स्मॉलकैप में) में इन्वेस्ट करते समय सेलेक्टिव रहना चाहिए। ज़्यादा वैल्यूएशन के कारण गलती की गुंजाइश बहुत कम रह गई है। इसको ध्यान में रखते हुए दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद,जिन शेयरों की अर्निंग मजबूत रहेगी और मार्जिन स्टेबल रहेंगे उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए।
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