प्राइवेट इक्विटी फर्म कार्लाइल (Carlyle) पिछले 3 साल में आईटी सर्विसेज फर्म हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड से तकरीबन 1,380 करोड़ रुपये (16.5 करोड़ डॉलर) का डिविडेंड हासिल कर चुकी है। कार्लाइल ने नवंबर 2021 में तकरीबन 3 अरब डॉलर (22,201 करोड़ रुपये) में हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज का अधिग्रहण किया था। कंपनी ने पिछले हफ्ते ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स (DRHP) सौंपा था, जिसके बाद यह जानकारी मिली है।
आम तौर पर प्राइवेट इक्विटी फर्में कंपनियों के अधिग्रहण के लिए विदेशी कर्ज का सहारा लेती हैं और उसके बाद कंपनी के कैश फ्लो का इस्तेमाल कर्ज भुगतान आदि में करती हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कार्लाइल ने 2021 में हेक्सावेयर की फाइनेंसिंग के लिए तकरीबन 1 अरब डॉलर की फाइनेंसिंग हासिल की थी।
हेक्सावेयर के DRHP के मुताबिक, कार्लाइल द्वारा कंपनी के अधिग्रहण के बाद जनवरी से दिसंबर 2022 के दौरान उसने 663.7 करोड़ रुपये के कुल डिविडेंड का भुगतान किया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में दिए गए डिविडेंड (240.9 करोड़ रुपये) का तकरीबन तीन गुना है। 31 दिसंबर को खत्म हुए वित्त वर्ष 2023 के लिए हेक्सावेयर ने कुल 530.8 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया, जबकि 30 जून को खत्म छमाही में कंपनी का डिविडेंड 258 करोड़ रुपये था।
कार्लाइल द्वारा अधिग्रहण के बाद से हेक्सावेयर ने 1,452.5 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया है। इस कंपनी में प्राइवेट इक्विटी फर्म कार्लाइल की हिस्सेदारी 95.08 पर्सेंट है। इसका मतलब है कि कार्लाइल को 1,380 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला। डिविडेंड भुगतान करने के मामले में हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज की रैंकिंग BSE 100 इंडेक्स कंपनियों में 34वीं है। डिविडेंड भुगतान करने के मामले में कंपनी विप्रो (522.4 करोड़ रुपये), ICICI लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस (515.83 करोड़ रुपये) और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (511.41 करोड़ रुपये) से आगे रही है।
हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज के प्रस्तावित IPO के तहत कार्लाइल 9,950 करोड़ के शेयरों की बिक्री करेगी। कंपनी का इरादा अपने के लिए रकम जुटाना नहीं है। हेक्यावेयर का IPO देश की किसी आईटी कंपनी द्वारा नए शेयरों की बिक्री के लिहाज से सबसे बड़ा IPO होगा।