Chris Wood ने फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट 50 BPS घटाने पर हैरानी जताई, कहा-इसकी वजह राजनीतिक है

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने 18 सितंबर को इंटरेस्ट रेट में 50 बीपीएस की कमी की। फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में कमी करने का अनुमान पहले से लगाया जा रहा था। लेकिन, वह इसमें कितनी कमी करेगा यह साफ नहीं था

अपडेटेड Sep 19, 2024 पर 6:08 PM
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क्रिस वुड ने कहा कि इंडिया में हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता जताई जा रही है। ऐसे में ग्लोबल फंड्स ब्राजील और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों पर दांव लगा सकते हैं।

जेफरीज के क्रिस वुड ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स की कमी करने के फैसले पर हैरानी जताई है। उनका मानना है कि इंटरेस्ट रेट में इतनी ज्यादा कमी करने की राजनीतिक वजह हो सकती है। फेडरल रिजर्व ने 18 सितंबर को इंटरेस्ट रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कमी की है। इसकी उम्मीद पहले से की जा रही थी। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स ने इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की उम्मीद जताई थी।

अमेरिकी इकोनॉमी में मंदी के संकेत

न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के पूर्व प्रेसिडेंट बिल डुडली सहित कुछ इकोनॉमिस्ट्स ने इंटरेस्ट रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की मांग की थी। जेफरीज के ग्लोबल हेड (इक्विटी स्ट्रेटेजी) Chris Wood ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा कि हालांकि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा है कि उन्हें अमेरिकी इकोनॉमी में कमजोरी के संकेत नहीं दिख रहे, लेकिन जेफरीज का मानना है कि अमेरिकी इकोनॉमी के मंदी में जाने का रिस्क है। वहां लेबर मार्केट में हालात बिगड़ रहे हैं।


इंटरेस्ट रेट घटने का इंडिया को ज्यादा फायदा नहीं

फेडरल रिजर्व की एफओएमसी की आगे की बैठकों में इंटरेस्ट रेट में कमी के अनुमान के बारे में वुड ने कहा कि वह ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देते। उनका फोकस इनफ्लेशन और जॉब के डेटा और इंटरेस्ट रेट में होने वाली कटौती पर होगा। उन्होंने कहा कि इंटरेस्ट रेट में कमी उभरते बाजारों के लिए अच्छी खबर है। इंटरेस्ट रेट घटने का इंडियन मार्केट पर पड़ने वाले असर के बारे में उन्होंने कहा कि उभरते बाजारों में इसका सबसे फायदा इंडिया को मिलने की उम्मीद नहीं है।

इंडियन मार्केट की वैल्यूएशन ज्यादा

वुड ने कहा कि इंडिया में हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता जताई जा रही है। ऐसे में ग्लोबल फंड्स ब्राजील और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों पर दांव लगा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बात की संभावना है कि आरबीआई इंटरेस्ट रेट घटाने में जल्दबाजी नहीं दिखाएगा। उन्होंने कहा कि अगर इंडियन मार्केट्स में गिरावट आती है तो यह विदेशी निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका होगा।

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इंफ्रास्ट्रक्टर पर खर्च का असर शेयरों पर

उन्होंने कहा कि इंडिया पूंजीगत खर्च साइकिल के बीच में है। पिछले कुछ महीनों में इसका असर एनर्जी और पूंजीगत खर्च से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दिखा है। इन शेयरों में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि वह इंडिया में अपना निवेश बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि इंफ्रा स्टोरी का असर दिख रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर में भी हालात बेहतर हुए हैं।

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