क्रिसकैपिटल ने इंडिया में 100 से ज्यादा कंपनियों में निवेश किया है। 80 कंपनियों में हिस्सेदारी की बिक्री से इसने इनवेस्टर्स को 6.5 अरब डॉलर लौटाए हैं। आईसीआईसीआई वेंचर्स के निवेश वाले वेस्टर्न डेजर्ट्स ब्रांड थियोब्रोमा में नियंत्रण योग्य हिस्सदारी की डील करने के बाद क्रिसकैपिटल के सीआईओ संजय कुकरेजा ने मनीकंट्रोल से एक्सक्लूसिव बातचीत की। इसमें उन्होंने स्टॉक मार्केट्स और इनवेस्टमेंट के बारे में कई बातें बताईं।
क्रिसकैपिटल के निवेश वाली 6 कंपनियां लिस्टिंग की तैयारी में
कुकरेजा ने कहा कि ChrysCapital के पोर्टफोलियो में ऐसी 6 कंपनियां शामिल हैं, जो आईपीओ पेश करने वाली हैं। इनमें NSE और LensKart जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। अगले तीन साल में इन कंपनियों की लिस्टिंग से क्रिसकैपिटल को 3 अरब डॉलर मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इंडियन मार्केट काफी बड़ा है। अगले 12 महीनों में करीब 40-50 अरब डॉलर की सिर्फ प्राइवेट इक्विटी डील होने वाली हैं।
मिडकैप कंपनियों में वैल्यूएशन बड़ा मसला नहीं
इंडियन मार्केट्स की वैल्यूएशन के बारे में उन्होंने कहा कि यह एक चिंता है। हमें यह चैलेंज दिख रहा है। हालांकि, ज्यादा वैल्यूएशन का मामलाी टॉप 50 से 100 कंपनियों तक सीमित है। अगर आप मिड-रेंज की कंपनियों को देखें तो वैल्यूएशन एक बड़ा मसला नहीं है। हालांकि, इस बारे में अलग-अलग सेक्टर के हिसाब से देखना होगा। उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल सर्विसेज काफी सही दिख रहा है। एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर भी गिरावट के बाद अट्रैक्टिव हो गए हैं।
अच्छी ग्रोथ की वजह से निवेश के लिए माहौल अनुकूल
कुकरेजा ने कहा कि फार्मा और हेल्थकेयर स्टॉक्स अब भी महंगे हैं। हालांकि, इन सेगमेंट्स की कंपनियों का बिजेनस तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इनवेस्टर्स को सही स्टॉक का चुनाव करने के लिए अलग-अलग सेक्टर को देखना होगा। हालांकि, अच्छी ग्रोथ और इनफ्लेशन के काबू में आने से इंडियन मार्केट मजेदार दिख रहे हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि माहौल अनुकूल है। इकोनॉमी को लेकर कोई मसला नहीं है और टैरिफ को लेकर डर घटा है। ऐसे में अगले 12 महीनों में अच्छी डील होने की उम्मीद है।
बड़ी एनबीएफसी को खुद को लिस्ट कराने में फायदा
उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल कंपनियों और एनबीएफसी के लिए कैपिटल रॉ मैटेरियल की तरह है। इन कंपनियों को लिस्टिंग के लिए आगे बढ़ना चाहिए। अगर किसी कंपनी का बिजनेस अच्छे लेवल पर पहुंच गया है और प्रदर्शन में स्थिरता है तो उसे प्राइवेट नहीं रहना चाहिए। प्राइवेट बने रहने के मुकाबले पब्लिक बनना ज्यादा फायदेमंद है। पब्लिक बनने का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे कैपिटल जुटाना आसान हो जाता है। ऐसा डेट और इक्विटी दोनों मामलों में है। इससे वैल्यू क्रिएशन में मदद मिलती है।