जलवायु परिवर्तन से इनवेस्टर्स को भी नुकसान, शेयरों पर दिख रहा ज्यादा गर्मी, बाढ़ और तूफान का असर

जरूरत से ज्यादा गर्मी, बाढ़ और तूफान की फ्रीक्वेंसी बढ़ी है। मौसम की प्रतिकूल स्थितियों की वजह से आर्थिक गतिविधियां बंद होने के मामले बढ़ रहे हैं। अगल इस साल अल नीनो की स्थितियां पैदा होती हैं तो इससे मानसून में बारिश कम हो सकती है

अपडेटेड Apr 26, 2023 पर 1:53 PM
मौसम की प्रतिकूल स्थितियों का असर हमेशा कंपनियों पर पड़ता रहा है। इससे बिजनेस में मुश्किल आती है। लेकिन, अब मौसम में बदलाव की घटनाएं पहले के मुकाबले बढ़ रही हैं।

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर कुछ प्रमुख एशियाई बाजारों में स्टॉक इनवेस्टर्स पर पड़ा है। लू और बाढ़ ने कंपनियों के लिए रिस्क बढ़ा दी है। अल नीनो का खतरा भी बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में इस महीने की शुरुआत में Newcrest Mining के टेफलर गोल्ड माइन को बंद कर दिया गया। इससे कंपनी के शेयर दो साल के हाई लेवल से गिर गए। वेस्टर्न आस्ट्रेलिया में एक दशक के सबसे भीषण तूफान आने की वजह से ऐसा किया गया। इसके बाद भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो गईं। इसका असर कोल प्रोडक्शन पर पड़ा। इधर, इंडिया में इस साल फरवरी पिछले 100 साल में सबसे ज्यादा गर्म रहा।

हीट वेव की वजह से डेयरी प्रोडक्शन घटने की आशंका

मौसम की प्रतिकूल स्थितियों का असर पशुओं की मौत से लेकर डेयरी प्रोडक्शन में गिरावट के रूप में देखने को मिला है। इंडिया दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। गर्मी में हीट वेव का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसका असर डेयरी कंपनियों के उत्पादन पर पड़ना तय है। इसका असर Parag Milk Foods और Heritage Foods के शेयरों पर दिख रहा है। इनमें तेजी का रुख है।


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बढ़ रही मौसम में बदलाव की घटनाएं

मौसम की प्रतिकूल स्थितियों का असर हमेशा कंपनियों पर पड़ता रहा है। इससे बिजनेस में मुश्किल आती है। लेकिन, अब मौसम में बदलाव की घटनाएं पहले के मुकाबले बढ़ रही हैं। हालांकि, यह सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं है लेकिन यह सच है कि इस इलाके में ऐसी घटनाओं का असर इस साल अब तक अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिला है। ऐसी घटनाओं पर नजर रखने वाले रिसर्चर्स और एनालिस्ट्स का कहना है कि अब कंपनियों को ऐसी स्थितियों के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए।

मुश्किल हो रहा मौसम का अनुमान लगाना

मुंबई की किम इंग सिक्योरिटीज में रिसर्च हेड जिगर शाह ने कहा, "डिमांड और आउपुट ट्रेंड का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। इसकी वजह यह है कि मौसम के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर इस पर काबू नहीं पाया गया तो एग्री और फूड चेन को खतरा पैदा हो सकता है।" अल निनो की स्थितियां बनने का मतलब यह है कि एशिया और ऑस्ट्रेलिया में गर्मी ज्यादा होगी और मौसम सूखा रहेगा। थाईलैंड में आने वाले महीनों में ऐसी स्थितियां बनने के अनुमान का असर एग्रीकल्चर कंपनियों, ड्रिंक मैन्युफैक्चरर्स और ऐसी दूसरी कंपनियों के शेयरों पर पड़ रहा है।

अल नीनो की वजह से कम हो सकती है मानसून में बारिश

ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस की एक एनालिसिस से पता चलता है कि अल नीनो की स्थिति बनने पर इंडिया में उन कंपनियों के शेयरों पर ज्यादा असर पड़ेगा, जिनके रेवेन्यू का ज्यादा हिस्सा ग्रामीण इलाकों से आता है। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के एनालिस्ट नितिन चांदुका ने कहा कि इस साल अल नीना की स्थितियां बनने का अनुमान जताया गया है। इससके चलते मानसून में बारिश में कमी देखने को मिल सकती है। इसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में इकोनॉमिक रिकवरी पर खराब असर पड़ेगा।

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