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Coal India share price : मजबूत बाजार में भी 5% टूटा कोल इंडिया का शेयर, जानिए क्या रही वजह

Coal India share price :शुक्रवार को कोल इंडिया में फीसदी की तेज गिरावट देखने को मिली है। दरअसल कंपनी ने आज साफ किया है कि इनपुट कॉस्ट की बढ़ती लागत के बावजूद ग्राहकों पर बोझ नहीं डाला है। इस खबर के बाद शेयर में भारी बिकवाली आई है। कोल इंडिया ने बताया कि विस्फोटक की कीमतें 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई है

Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Apr 10, 2026 पर 3:54 PM
Coal India share price : मजबूत बाजार में भी 5% टूटा कोल इंडिया का शेयर, जानिए क्या रही वजह
Coal India share price : बाजार में आई तेजी के बावजूद आज कोल इंडिया में कमजोरी नजर आई है। 10 अप्रैल को भारतीय इक्विटी इंडेक्स मज़बूत बढ़त के साथ बंद हुए हैं

Coal India share price : शुक्रवार को कोल इंडिया लिमिटेड के शेयरों में भारी गिरावट आई और ये इंट्राडे में 5 फीसदी तक टूट कर निफ्टी पर सबसे ज़्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों रहा। जबकि दूसरी ओर पूरा बाजार मजबूती से बढ़त बनाए रहा। यह गिरावट कंपनी के उस बयान के बाद आई जिसमें कहा गया है कि कंपनी इनपुट लागत में हुई भारी बढ़ोतरी का बोझ खुद उठा रही है और कोयले की कीमतें ऐसी रख रही है जिससे वह उपभोक्ताओं के लिए किफायती बना रहे।

कोल इंडिया में गिरावट क्यों?

कोल इंडिया ने बताया कि विस्फोटक की कीमतें 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई हैं, जबकि इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतें 54 प्रतिशत बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। इन दबावों के बावजूद, कंपनी ने लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर न डालने का फैसला लिया है। कंपनी ने बताया है कि 1 अप्रैल से अमोनियम नाइट्रेट (विस्फोटक के तौर पर इस्तेमाल होने वाला) की कीमत 44% बढ़ी हैं। अमोनियम नाइट्रेट की कीमत 44% बढ़कर 72,750 रुपए प्रति टन। अमोनियम नाइट्रेट के साथ डीजल के दाम भी बढ़े हैं। ई-ऑक्शन में कुछ सब्सिडियरीज ने कोल रिजर्व की कीमतें घटाईं हैं। कंपनी का फोकस सस्ती दरों पर कोयला सप्लाई करने पर है।

अपनी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी के तहत, कोल इंडिया ने सिंगल-विंडो, मोड-एग्नॉस्टिक ई-ऑक्शन में कोयले की रिज़र्व कीमत कम कर दी है। इसका मकसद किफायती कीमतों पर ड्राइ ईंधन उपलब्ध कराना और डाउनस्ट्रीम लागत में बढ़ोतरी को रोकना है। हालांकि, इस कदम का निवेशकों के सेंटिमेंट पर बुरा असर पड़ता दिख रहा है, क्योंकि बाज़ार इस बात पर फोकस कर रहा है कि लागत को खुद उठाने (cost absorption) से कंपनी के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

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