Cochin Shipyard OFS : सरकारी डिफेंस और शिपबिल्डिंग कंपनी Cochin Shipyard Ltd में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) का ऐलान किया गया है। पहले चरण में सरकार 2.52% हिस्सेदारी बेचेगी। अगर निवेशकों की ओर से अच्छी मांग रही, तो ग्रीन-शू ऑप्शन के तहत इतनी ही अतिरिक्त 2.52% हिस्सेदारी भी बिक्री के लिए लाई जाएगी।
सरकार ने OFS का फ्लोर प्राइस 1,400 रुपये प्रति शेयर तय किया है। यह सोमवार के बंद भाव से करीब 7.2% डिस्काउंट पर रखा गया है। गैर-रिटेल निवेशक 7 जुलाई 2026 को बोली लगा सकेंगे। वहीं, रिटेल निवेशकों के लिए OFS 8 जुलाई 2026 को खुलेगा।
सरकार क्यों बेच रही है हिस्सेदारी?
यह हिस्सेदारी बिक्री सरकार के विनिवेश (Disinvestment) कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसे जुटा रही है।
मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग डेटा के मुताबिक, कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 67.91% है। रिटेल इनेवस्टर्स के पास 22.95% हिस्सा है। वहीं, FII 3.10% और DII 6.05% हिस्से के मालिक हैं।
सरकार ने कितना पैसा जुटाया?
केंद्र सरकार ने हाल के महीनों में विनिवेश की रफ्तार तेज कर दी है। 21 मई से अब तक सरकार अलग-अलग PSU कंपनियों के OFS के जरिए 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा चुकी है।
Cochin Shipyard Ltd का शेयर सोमवार को 19 रुपये यानी 1.25% गिरकर 1,504.75 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में इस सरकारी कंपनी का स्टॉक 6.94% बढ़ा है। वहीं, 1 साल के दौरान इसमें 26.70% की गिरावट आई है।
Cochin Shipyard का बिजनेस
Cochin Shipyard Ltd भारत की सबसे बड़ी शिपयार्ड कंपनियों में से एक है। कंपनी भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के लिए युद्धपोत और दूसरे रक्षा जहाज बनाती है। इसके अलावा कमर्शियल जहाजों का निर्माण, शिप रिपेयर, जहाजों की मरम्मत और मेंटेनेंस का काम भी करती है। हाल के वर्षों में डिफेंस ऑर्डर और सरकारी फोकस की वजह से कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ा है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।