Coforge का प्रदर्शन 2023 में शानदार रहा। लेकिन, पिछले तीन महीनों में इसका प्रदर्शन Nifty और IT Index के मुकाबले कमजोर रहा है। कंपनी ने 3,200 करोड़ रुपये पूंजी जुटाने का ऐलान किया था। यह पैसा अधिग्रहण पर खर्च होगा। अधिग्रहण से कोफोर्ज की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। लेकिन, कंपनी का अधिग्रहण करने के लिए कोफोर्ज कितना पैसा चुकाती है और अधिग्रहण की जाने वाली कंपनी का मार्जिन प्रोफाइल कितना है, इसका असर आगे कोफोर्ज के शेयरों पर पड़ेगा। इसके बावजूद मुश्किल वक्त में अच्छी ग्रोथ, मजबूत ऑर्डर फ्लो और बढ़ते मार्जिन को देखते हुए कोफोर्ज का स्टॉक अट्रैक्टिव लगता है। इस वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में कंपनी की कंस्टेंट करेंसी (CC) ग्रोथ 14.7 फीसदी रही है। तीसरी तिमाही में तिमाही दर तिमाही ग्रोथ 1.8 फीसदी रही।
इस वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में कोफोर्ज की ग्रोथ को बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विसेज (BFS) का अच्छा सपोर्ट मिला। बीएफएस की ग्रोथ 15.5 फीसदी रही, जबकि इंश्योरेंस की ग्रथ 11.5 फीसदी रही। हालांकि कुछ क्लाइंट्स से जुड़ी प्रॉब्लम की वजह से ट्रैवल और ट्रांसपोर्टेशन सेगमेंट की ग्रोथ सिर्फ 3 फीसदी रही। अमेरिका में अब भी डिमांड सुस्त है, जबकि यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के साथ ही बाकी दुनिया से अच्छे ऑर्डर आए हैं।
ऑर्डर इनफ्लो लगातार 30 करोड़ डॉलर से ज्यादा
Coforge को नई डील्स के लिहाज से एग्रेसिव सेल्स और मार्केटिंग की फायदा मिला है। तीसरी तिमाही में कंपनी का ऑर्डर इनफ्लो 35.4 करोड़ डॉलर रहा। लगातार आठवीं तिमाही ऑर्डर फ्लो 30 करोड़ डॉलर से ज्यादा रहा। बीएफएस, इंश्योरेंस और पब्लिक सेक्टर में से प्रत्येक में कंपनी को 3-3 डील मिली। कंपनी ने तीसरी तिमाही में नए क्लाइंट्स भी बनाए। तीसरी तिमाही में कुल 9 नए क्लाइंट्स बनाए।
ईसॉप्स के साथ एडजस्ट करने के बाद कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन तिमाही दर तिमाही 200 बेसिस प्वाइंट्स बढ़कर 17.3 फीसदी पहुंच गई। कंपनी को चौथी तिमाही में मार्जिन बढ़ने की उम्मीद है। कंपनी को अगले वित्त वर्ष में भी मार्जिन बेहतर रहने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि एट्रिशन रेट एक साल पहले के 16 फीसदी से गिरकर 12 फीसदी पर आ गया है। यूटिलाइजेशन अब भी 80 फीसदी से कम है और ऑफशोर कंपोनेंट 52 फीसदी है। इससे मार्जिन बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
क्या आपको निवेश करना चाहिए?
कंपनी पर 974 करोड़ रुपये का कर्ज है। नई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी कर्ज घटाने के लिए कर सकती है। इससे इंटरेस्ट पर होने वाला खर्च घटेगा। इसके बाद भी नई पूंजी में से करीब 2,600 करोड़ रुपये कंपनी के पास बच जाएंगे। इसका इस्तेमाल अधिग्रहण के लिए होगा। कंपनी ने अगले 4-5 साल में 2 अरब डॉलर रेवेन्यू का टारगेट रखा है। इसमें से 15 करोड़ डॉलर अधिग्रहण के जरिए आएंगे। इस स्टॉक में लंबी अवधि के लिहाज से निवेश किया जा सकता है।
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