Copper Related Stocks: 1 साल में 43% बढ़े कॉपर के दाम, इन 4 सेक्टर को लगेगा बड़ा झटका; जानिए डिटेल

Copper Related Stocks: कॉपर की कीमतों में तेज उछाल से माइनिंग कंपनियों को फायदा मिल रहा है। हिंदुस्तान कॉपर का स्टॉक 1 महीने में 50% से ज्यादा उछल चुका है। लेकिन, कॉपर का दाम बढ़ने से कई सेक्टर पर दबाव भी बढ़ा है। जानिए किन सेक्टर्स और शेयरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

अपडेटेड Jan 07, 2026 पर 4:14 PM
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वायर्स और केबल बनाने वाली कंपनियां जैसे Polycab India, Finolex Cables, KEI Industries और Havells India कॉपर की सबसे बड़ी उपभोक्ता हैं।

Copper Related Stocks: ग्लोबल बाजार में कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे मेटल सेक्टर में जबरदस्त हलचल दिख रही है। पिछले 1 साल में कॉपर की कीमत करीब 43% बढ़ी है। यह तेजी इसलिए भी हैरान करती है क्योंकि 2012 के बाद से अब तक कॉपर के दाम लगभग 55% ही बढ़े हैं।

यही वजह है कि Hindustan Copper जैसी कॉपर माइनिंग कंपनी के शेयरों में तेज रैली देखने को मिल रही है। क्योंकि ऊंची कीमतों का सीधा फायदा प्रोड्यूसर्स और माइनर्स को मिलता है। हिंदुस्तान कॉपर का शेयर 1 महीने में 50% से ज्यादा बढ़ चुका है।

लेकिन तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। कॉपर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने वाले कई सेक्टर्स के लिए यह तेजी मार्जिन पर दबाव की वजह बन सकती है। कॉपर का इंडस्ट्रियल इस्तेमाल काफी ज्यादा है। इसलिए कीमतों में तेज उछाल का असर कई इंडस्ट्रीज तक फैल सकता है।


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वायर्स और केबल सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर

वायर्स और केबल बनाने वाली कंपनियां जैसे Polycab India, Finolex Cables, KEI Industries और Havells India कॉपर की सबसे बड़ी उपभोक्ता हैं। तीसरी तिमाही (Q3FY26) में इंटरनेशनल कॉपर कीमतें करीब 17 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, जिससे इन कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है।

हालांकि, इन कंपनियों के मैनेजमेंट का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी का असर आमतौर पर 15 दिन या महीने के भीतर डिस्ट्रीब्यूटर्स और ग्राहकों तक पास ऑन कर दिया जाता है।

तेज रैली का एक साइड इफेक्ट यह भी होता है कि डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर ज्यादा इन्वेंट्री स्टॉक की जाती है, ताकि आगे की महंगाई से बचा जा सके। इससे वायर्स और केबल कंपनियों को वॉल्यूम ग्रोथ का फायदा भी मिल सकता है। अब बाजार की नजर Q3FY26 की अर्निंग कॉल और आगे के प्राइस आउटलुक पर टिकी है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर पर भी दबाव

वायर्स और केबल के बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर दूसरा सबसे अहम सेगमेंट है, जहां कॉपर एक जरूरी कच्चा माल है। एयर कंडीशनर, पंखे, पंप जैसे कई प्रोडक्ट्स में कॉपर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। Voltas, Blue Star और Crompton Greaves Consumer Electrical जैसी कंपनियां Q3 नतीजों से पहले फोकस में रहेंगी।

दूसरी तिमाही (Q2FY26) की अर्निंग कॉल में Crompton Greaves ने पहले ही संकेत दिया था कि कमोडिटी महंगाई की वजह से मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। कीमतों में बदलाव का असर इन्वेंट्री स्टॉकिंग पर भी पड़ सकता है।

स्पेशलाइज्ड वाइंडिंग वायर्स और इंडस्ट्रियल कंपोनेंट्स

कॉपर का इस्तेमाल ट्रांसफॉर्मर, मोटर, वाइंडिंग वायर्स और कई इंडस्ट्रियल मशीनों में होता है। Precision Wires India जैसी कंपनियों के लिए कॉपर कुल रॉ मटीरियल लागत का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा बनाता है। वहीं Bhagyanagar Industries जैसी कंपनियां कॉपर फॉयल, पाइप, बस बार और ऑटो कंपोनेंट्स बनाती हैं। इन पर भी ऊंची कीमतों का असर पड़ेगा।

फिलहाल ज्यादातर कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों तक पास ऑन कर रही हैं। लेकिन, मार्जिन और वॉल्यूम पर इसका असली असर Q3 की अर्निंग कॉल के बाद ही साफ होगा।

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 कॉपर प्राइस की दूसरे सेक्टर्स पर भी पड़ेगी मार

इन सेक्टर्स के अलावा सोलर पैनल मैन्युफैक्चरर्स, ऑटो कंपनियां, OEMs और बैटरी बनाने वाली कंपनियां भी कॉपर की तेज महंगाई से प्रभावित हो सकती हैं। इन सेक्टर्स की कुछ प्रमुख कंपनियां इस तरह हैं।

  • सोलर पैनल मैन्युफैक्चरर्स: Waaree Energies, Adani Solar, Vikram Solar, Tata Power Solar।
  • ऑटो कंपनियां: Tata Motors, Mahindra & Mahindra, Maruti Suzuki, Ashok Leyland।
  • OEMs (ऑटो और इंडस्ट्रियल): Bosch, Cummins India, Schaeffler India, Siemens India।
  • बैटरी मैन्युफैक्चरर्स: Exide Industries, Amara Raja Energy & Mobility, Tata AutoComp Gotion, HBL Power Systems।

ज्यादातर मामलों में कीमतें ग्राहकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स तक पास ऑन कर दी जाती हैं। इससे मार्जिन तो बच जाते हैं, लेकिन बहुत तेज कीमत बढ़ने पर डिमांड और वॉल्यूम पर असर पड़ने का जोखिम बना रहता है।

आगे कैसी रह सकती है कॉपर की मांग 

JPMorgan की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉपर की सप्लाई साइड पर दबाव साफ तौर पर बढ़ा है। चिली में Capstone Copper की Mantoverde माइन में मजदूरों की हड़ताल चल रही है, जबकि इंडोनेशिया की Grasberg माइन में उत्पादन से जुड़ी दिक्कतें सामने आई हैं।

इन वजहों से ग्लोबल कॉपर सप्लाई और सख्त हुई है। चिली दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उत्पादक देश है, इसलिए वहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कॉपर कीमतों पर पड़ता है।

लॉन्ग टर्म नजरिए से देखें तो कॉपर की मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। सोलर पैनल्स में सिल्वर की जगह कॉपर का इस्तेमाल का चलन बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को भी ज्यादा लोग अपना रहे हैं। AI और डेटा सेंटर्स की बढ़ती बिजली खपत आने वाले वर्षों में कॉपर की डिमांड को और बढ़ा सकती है। ऐसे में कीमतें ऊंचे स्तर पर टिक सकती हैं। कॉपर से जुड़े शेयर आगे भी निवेशकों की नजर में बने रहेंगे।

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