JINIT PARMAR
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विलफुल डिफॉल्टर्स (Wilful defaulters) पर प्रमुख निजी और सरकारी बैंकों का 88,435 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि एक साल पहले 75,294 करोड़ रुपये बकाया था। बैंकों और क्रेडिट सूचना कंपनी ट्रांसयूनियन CIBIL के नवीनतम आंकड़ों के बारे में मनीकंट्रोल के विश्लेषण से ये जानकारी पता चली है। इस सूची में देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda (BOB) और पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank (PNB) जैसे सरकारी बैंक शामिल हैं। विलफुल डिफॉल्टर या इरादतन चूककर्ता उस व्यक्ति या संस्था को कहा जाता है जो पैसे चुकाने की क्षमता होने के बावजूद बैंक का कर्ज नहीं चुकाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो उधारलेने वाले के पास पैसा तो है, लेकिन पैसा वापस देने का इरादा नहीं है।
क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2022 तक विलफुल डिफॉल्टर्स पर PNB का 38,712 करोड़ रुपये बकाया था। ये बकाया दिसंबर 2021 में 37,055 करोड़ रुपये था।
वहीं अन्य सरकारी बैंक यानी कि Bank of Baroda के पास जनवरी 2023 तक विलफुल डिफॉल्टर्स का बकाया 38,009 करोड़ रुपये था। जो पिछले साल इसी अवधि में 24,404 करोड़ रुपये रहा था।
HDFC Bank के मामले में फरवरी 2023 तक विलफुल डिफॉल्टर्स पर बैंक का 11,714 करोड़ रुपये बकाया था। जो मार्च 2022 में 9,007 करोड़ रुपये रहा था।
टॉप विलफुल डिफॉल्टर
दिसंबर 2022 में भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India (RBI) के डेटा से पता चला है कि 31 मार्च, 2022 तक देश के शीर्ष 50 विलफुल डिफॉल्टर्स पर भारतीय बैंकों का 92,570 करोड़ रुपये बकाया है।
वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड (Bhagwat Karad, Minister of State for Finance) ने संसद में बताया कि गीतांजलि जेम्स लिमिटेड (Gitanjali Gems Limited) इस सूची में सबसे ऊपर है। इसने 7,848 करोड़ रुपये का ऋण नहीं चुकाया है। इसके बाद एरा इंफ्रा (Era Infra) का नाम है जिसने 5,879 करोड़ रुपये नहीं चुकाया है। तीसरे स्थान पर री एग्रो (Rei Agro) है जिस पर बैंकों का 4,803 करोड़ रुपये बकाया है।
आरबीआई के अनुसार विलफुल डिफॉल्टर्स को बैंकों या वित्तीय संस्थानों द्वारा कोई अतिरिक्त सुविधाएं मंजूर नहीं की जाती हैं। उनकी यूनिट्स को पांच साल के लिए नए उद्यम शुरू करने से रोक दिया जाता है।
विलफुल डिफॉल्टर्स और प्रोमोटर्स या डायरेक्टर्स के रूप में विलफुल डिफॉल्टर्स कंपनियों को सेबी रेगुलेशन 2016 के तहत शेयरों के अधिग्रहण और टेकओवर के जरिये धन जुटाने के लिए कैपिटल मार्केट में रोक लगाई गई है।
भारत में वसूली प्रक्रिया धीमी
आरबीआई के पूर्व कार्यकारी निदेशक चंदन सिन्हा ने कहा “बैंक के साथ एक डिफॉल्ट के मामले वसूली प्रक्रिया भारत में धीमी है। आईबीसी के माध्यम से एक त्वरित निवारण की आवश्यकता है। जिससे की ऋणदाता विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ त्वरित कानूनी उपाय का उपयोग कर सकें।"
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