क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रही तो फिर से महंगाई रुलाएगी

ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही तो इनफ्लेशन 6 फीसदी को पार कर जाएगा। इसका मतलब है कि यह आरबीआई की तय रेंज से बाहर निकल जाएगा। इसके बाद आरबीआई को इंटरेस्ट रेट बढ़ाना पड़ेगा

अपडेटेड Apr 03, 2026 पर 6:50 PM
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महंगे क्रूड का असर कई उद्योगों पर दिखना शुरू हो गया है।

क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही तो इनफ्लेशन 6 फीसदी को पार कर जाएगा। इसका मतलब है कि यह आरबीआई की तय रेंज से बाहर निकल जाएगा। इसके बाद आरबीआई को इंटरेस्ट रेट बढ़ाना पड़ेगा। ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने यह अनुमान जताया है। मध्यपूर्व में लड़ाई की वजह से पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है।

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी 8 अप्रैल को आएगी

HSBC के इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड ऑयल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहती है तो रिटेल इनफ्लेशन 6 फीसदी से नीचे रहेगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक, "हम एक चौराहे पर हैं, क्योंकि ब्रेंट का एवरेज प्राइस मार्च में 100 डॉलर रहा है।" यह रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब आरबीआई अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करने वाला है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6 अप्रैल को शुरू होगी। इसके नतीजे 8 अप्रलै को आएंगे।


महंगाई काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकती है RBI

विदेशी ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए आरबीआई 8 अप्रैल को रेपो रेट बढ़ा सकता है। आरबीआई के लिए अभी रुपये को गिरने से बचाने का चैलेंज है। अगर रिटेल इनफ्लेशन बढ़ता है तो इसे काबू में करने की चैलेंज भी आरबीआई पर होगा। 28 फरवरी को मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू हुई थी। उसके बाद क्रूड की कीमतों में उछाल आया। महंगे क्रूड की वजह से कई चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। क्रूड में उछाल से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ी है।

अभी फिस्कल और मॉनेटरी मोर्चे पर न्यूट्रल रुख अपनाने की सलाह

एचएसबीसी के इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि अभी फिस्कल और मॉनेटरी दोनों ही मोर्चों पर न्यूट्रल रुख अपनाना ठीक रहेगा। इसकी वजह यह है कि सप्लाई अभी सामान्य नहीं है जिससे डिमांड बढ़ने पर इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा पैदा होगा। क्रूड की ऊंची कीमतें इंडियन इकोनॉमी पर भी असर डालेंगी। कई एक्सपर्ट्स ने जीडीपी ग्रोथ में कमी का अनुमान जताया है। अब तक भारत की ग्रोथ अच्छी थी। इनफ्लेशन भी काबू में था।

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कई उद्योगों पर दिखने लगा है महंगे क्रूड का असर

महंगे क्रूड का असर कई उद्योगों पर दिखना शुरू हो गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी मध्यपूर्व की लड़ाई खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को देश को संबोधन में आक्रामक रुख का संकेत दिया। उन्होंने ईरान पर हमले तेज करने की भी बात कही। अगर ऐसा होता है तो क्रूड की कीमतों में फिलहाल नरमी की उम्मीद नहीं है।

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