Crude Oil Prices: अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई खत्म होने की उम्मीद से 31 मार्च को अमेरिकी बाजारों में जबर्दस्त तेजी आई थी। उसका असर 1 अप्रैल को भारत सहित एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला। शेयर बाजारों में जबर्दस्त तेजी दिखी। सुबह में निफ्टी और सेंसेक्स बड़ी तेजी के साथ खुले। अच्छी खरीदारी से सूचकांकों में तेजी बनी रही। 12:05 बजे सेंसेक्स 1,722 अंक यानी 2.40 फीसदी के उछाल के साथ 73,682 प्वाइंट्स पर था। निफ्टी भी 506 यानी 2.26 फीसदी की रिकवरी के साथ 22,838 पर चल रहा था। खास बात यह है कि भारतीय समय के मुताबिक दोपहर तक क्रूड ऑयल की कीमतों में भी गिरावट शुरू हो गई।
ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर पर आया
दिन में 12:25 बजे ब्रेंट क्रूड 4.48 फीसदी की गिरावट के साथ 99 डॉलर पर आ गया। इसे मध्यपूर्व में लड़ाई खत्म होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 2 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में क्रूड में तेजी देखने को मिली थी। भाव करीब 2 फीसदी तक चढ़ गया था। ब्रेंट क्रूड 1.8 फीसदी चढ़कर 105.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.7 फीसदी चढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। लेकिन, दिन में 12 बजे के करीब अचानक क्रूड की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई।
मध्यूपूर्व में लड़ाई से क्रूड में उछाल
मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने का सबसे ज्यादा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड ज्यादातर समय 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना रहा है। भारत में कमोडिटी एक्सचेंज MCX में भी क्रूड ऑयल प्राइसेज में तेजी दिखी है। क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए निगेटिव है। इसकी वजह यह है कि भारत 90 फीसदी से ज्यादा क्रूड का इंपोर्ट करता है। क्रूड में उछाल से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ रहा है। इसका असर बैलेंस ऑफ पेमेंट पर दिखेगा।
27 फरवरी को 72 डॉलर था क्रूड
पश्चिम एशिया में लड़ाई शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल थी। उसके बाद इसमें उछाल दिखा। एक समय कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गई थी। उसके बाद इसमें कुछ नरमी आई। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बनी रहती हैं तो इसका असर ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ पर पड़ेगा। खासकर भारत जैसे देशों पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा जो काफी ज्यादा क्रूड इंपोर्ट करते हैं।