अमेरिकी पॉलिसी भारतीय बाजार पर दिखाएगी असर, बैंकिंग और फार्मा शेयर कराएंगे खूब कमाई

Daily Voice : श्रीकांत सुब्रमण्यन का मानना है कि भारत की आगे की ग्रोथ स्टोरी काफी मजबूत दिख रही है। भारत के ग्रोथ में बैंकिंग सेक्टर का अहम योगदान होगा। ऐसे में बैंकिंग शेयरों में आगे अच्छी तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि इस समय भारतीय फार्मा सेक्टर तुलनात्मक रूप से ज्यादा बेहतर दिख रहा है। फार्मा शेयरों ने सबसे लंबे समय तक खराब प्रदर्शन किया और अब यह सेक्टर इस कैलेंडर वर्ष में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर में रहा है

अपडेटेड Aug 16, 2023 पर 12:12 PM
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Daily Voice : श्रीकांत सुब्रमण्यन की सलाह है कि इस समय हमें आईटी शेयरों के लेकर सतर्क रहना चाहिए। कंपनियो के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजरें बनाए रखें। आगे जेनरेटिव एआई की मांग बढ़ने की उम्मीद है

Daily Voice : डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म कोटक चेरी ( Kotak Cherry) के सीईओ श्रीकांत सुब्रमण्यन (Srikanth Subramanian) ने मनीकंट्रोल को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की गतिविधियां अब तक काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक ही रही हैं, लेकिन अमेरिका में लगातार हाई स्तर पर बने वेतन आंकड़े और नौकरियों में बढ़त निवेशकों को संकट में डाल सकती है। उनका मानना ​​है कि आगे अमेरिका की मॉनीटरी और फिस्कल पॉलिसी (डाउनग्रेड के बाद) भारतीय इक्विटी मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। इक्विटी मार्केट का 2 दशकों के ज्यादा का अनुभव रखने वाले श्रीकांत सुब्रमण्यन की टॉप पिक्स में बैंकिंग और फार्मा शेयर शामिल हैं।

बैंकिंग और फार्मा शेयर कराएंगे जोरदार कमाई

श्रीकांत सुब्रमण्यन का मानना है कि भारत की आगे की ग्रोथ स्टोरी काफी मजबूत दिख रही है। भारत के ग्रोथ में बैंकिंग सेक्टर का अहम योगदान होगा। ऐसे में बैंकिंग शेयरों में आगे अच्छी तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि इस समय भारतीय फार्मा सेक्टर तुलनात्मक रूप से ज्यादा बेहतर दिख रहा है। फार्मा शेयरों ने लंबे समय तक खराब प्रदर्शन किया और अब यह सेक्टर इस कैलेंडर वर्ष में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर में रहा है। फार्मा सेक्टर ने चालू कैलेंडर वर्ष में 20 फीसदी रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी ने इसी अवधि में 9 फीसदी रिटर्न दिया है। फार्मा कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में काफी अच्छा कंसोलीडेशन देखने को मिला है। ऐसे में अब भारतीय फार्मा खिलाड़ियों के लिए काफी अच्छी ग्रोथ संभावनाएं देखने को मिल रही हैं।


बाजार में जारी रहेगी तेजी

इक्विटी मार्केट पर बात करते हुए श्रीकांत ने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2023 में भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी निवेशकों की तरफ से 5 अरब डॉलर की बिकवाली हुई। निफ्टी ने वित्तीय वर्ष 2023 में 0.6 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया। जबकि वित्त वर्ष 2024 में 31 जुलाई 2023 तक भारत में विदेशी निवेशकों की तरफ 18 अरब डॉलर का एफपीआई निवेश देखने को मिला है। इस अवधि में निफ्टी ने 13.8 फीसदी का रिटर्न दिया है। एक बात और साफ है कि भारतीय बाजारों में घरेलू निवेशकों ने भी जम कर पैसे लगाए है। अब विदेशी निवेशकों का रुख भी भारतीय बाजार की तरफ नजर आ रहा है। ऐसे में विदेशी और घरलू दोनों निवेशकों के दम पर हमारे बाजार नई उड़ान भर रहे हैं। बाजार की ये उड़ान अभी और ऊंची होती दिखेगी।

आईटी सेक्टर को लेकर रहें सतर्क

आईटी सेक्टर पर बात करते हुए श्रीकांत सुब्रमण्यन ने कहा कि आईटी सेक्टर के नतीजों की शुरुआत अच्छी रही, जिससे बाजार में खुशी देखने को मिली। लेकिन नतीजों के सीज़न में इन कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंटरी ने माहौल खराब कर दिया और आईटी इंडेक्स पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कुल मिलाकर आईटी कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कमजोर ही रहे हैं। टियर-1 आईटी शेयरों पर पिछले कुछ समय से दबाव बना है। इस समय इनका भाव अच्छा दिखा रहा है लेकिन इनमें निवेश के पहले आगे के आउटलुक को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

तमाम अमेरिकी बैंकों (अधिकांश भारतीय आईटी कंपनियों के लिए सबसे बड़े ग्राहक) की कमेंट्री से पता चलता है कि इनकी तरफ से आईटी पर किया जाने वाला खर्च अभी पटरी पर नहीं आया है। कंपनियां गैर जरूरी खर्चे को टाल रही हैं जिसके चलते नए डील बहुत कम हो रहे हैं। बीएफएसआई सेक्टर की कंपनियों की कमेंट्री में तकनीकी खर्च पर होने वाले बढ़त का कोई संकेत नहीं मिला है। ऐसे में हमें सिर्फ शेयर कीमतों में गिरावट को देखते हुए आईटी शेयरों में खरीदारी नहीं करनी चाहिए।

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श्रीकांत सुब्रमण्यन की सलाह है कि इस समय हमें आईटी शेयरों को लेकर सतर्क रहना चाहिए। कंपनियो के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजरें बनाए रखें। आगे जेनरेटिव एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की मांग बढ़ने की उम्मीद है। हमें देखना होगा कि भारतीय आईटी कंपनियां इस मौके का कितना फायदा उठा पाती हैं। इसके अलावा इनसोर्सिंग का असर भी भारतीय आईटी सेक्टर की कमाई पर पड़ेगा। हमें देखना होगा कि भारतीय आईटी कंपनियां इस चुनौती से कैसे निपटती हैं।

 

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