आशिका ग्लोबल फैमिली ऑफिस सर्विसेज के सह-संस्थापक अमित जैन के अनुसार, इस समय आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, एफएमसीजी, रियल एस्टेट, डिफेंस सबसे अधिक महंगे हो चुके सेक्टर हैं। इसलिए इन सेक्टरों में कोई दांव नहीं लगाने की सलाह होगी। हालांकि, वैल्यू इन्वेस्टिंग के नजरिए से अमित को मौजूदा स्तरों पर मध्यम से लंबी अवधि के नजरिए से पीएसयू और पीएसयू बैंक में वैल्यू दिख रही है। उन्होंने आगे कहा कि कमजोर नतीजों और बाहरी दबावों से संकेत मिल रहा है कि निफ्टी 50 को निकट भविष्य में तेज से रिकवरी के बजाय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है
क्या आपको लगता है कि बाजार में गिरावट जारी रहेगी और निफ्टी 50 में करीब 1,000 अंकों की गिरावट (24,400-24,500 के स्तर से) आएगी?
इस पर अमित ने कहा कि हां,इस समय ग्लोबल और भारतीय शेयर बाजार को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। मौजूदा बाजार सेंटीमेंट मंदी की ओर है। हालांकि निफ्टी के लिए 24,000 के आसपास बड़ा सपोर्ट है। भू-राजनीतिक तनाव और एफआईआई की बिकवाली वोलैटिलिटी बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा तकनीकी इंडीकेटर बता रहे हैं कि रजिस्टेंस लेवल को तोड़ना मुश्किल है जो आगे और गिरावट की संभावना को दर्शाता है। कुल मिलाकर कमजोर नतीजों और बाहरी दबावों से संकेत मिल रहा है कि निफ्टी 50 को निकट भविष्य में तेज से रिकवरी के बजाय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या आपको लगता है कि कुछ बैंकों को छोड़कर, कुल मिलाकर तिमाही नतीजों का मौसम कमजोर रहा है?
भारत में मौजूदा तिमाही नतीजों का मौसम निराशाजनक रहा है। इस अवधि में कई कंपनियां मुनाफे और कमाई की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। जहां कुछ बैंकों ने मजबूती दिखाई है। वहीं, ऑटोमोबाइल और FMCG जैसे सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ कमजोर रही है। अधिकांश मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां बाज़ार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई हैं। परिणामस्वरूप हमने पिछले तीन महीनों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप में गिरावट देखी है। इसे समझने के लिए यहां शेयर की कीमत में गिरावट का सारांश संलग्न किया जा रहा है -
इस बाजार में करेक्शन के दौरान निवेश के लिए किन सेक्टरों पर नजर रखनी चाहिए या कौन से सेक्टर आकर्षक दिख रहे हैं?
इस समय, ऐसे बहुत कम सेक्टर हैं जो मौजूदा भाव पर वैल्यू और ग्रोछ का सही मिश्रण देते हैं। हालांकि, रिस्क-रिवॉर्ड के नजरिए से इस समय ग्रोथ के बजाय वैल्यू इन्वेस्टिंग को प्राथमिकता देने की जरूरत है। वैल्यू इन्वेस्टिंग के नजरिए से अमित को मौजूदा स्तरों पर मध्यम से लंबी अवधि के नजरिए से पीएसयू और पीएसयू बैंक अच्छे लग रहे हैं।
क्या आपको लगता है कि 2025 में IPO के ज़रिए फंड जुटाना 2024 से बेहतर होगा? क्या मौजूदा करेक्शन स्विगी, NTPC ग्रीन एनर्जी और दूसरे IPO में देरी करेगा?
अमित का मानना है कि 2025 में IPO से फंड जुटाने का आंकड़ा संभवतः 2024 से भी आगे निकल जाएगा। उनका कहना है कि बाज़ार की स्थितियों में सुधार होने के साथ ही एक मज़बूत पाइपलाइन सामने आएगी। हालांकि, मौजूदा करेक्शन के कारण हाई-प्रोफ़ाइल IPO में देरी हो सकती है। हाई-प्रोफ़ाइल कंपनियां अपने आईपीओ को तब तक टालने का विकल्प चुन सकती हैं जब तक कि बाजार की स्थितियां अनुकूल न हो जाएं।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।