Daily Voice : राइट होराइजन्स ( Right Horizons) के संस्थापक और फंड मैनेजर अनिल रेगो का मानना है कि मजबूत प्रोडक्ट पाइपलाइन और अच्छे प्रीमियम प्रोडक्ट मिक्स के चलते ऑटो सेक्टर में ओईएम (original equipment manufacturers) कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन की संभावना दिख रही है। उनका मानना है कि आगे कमर्शियल वाहनों (सीवी) की मांग में मजबूती रहने की संभावना है। इसके साथ ही पैसेंजर वाहन (पीवी) और यूटिलिटी वाहनों (यूवी) की मांग में भी तेजी जारी रहने की उम्मीद है। जबकि कारों की मांग में थोड़ी सुस्ती आ सकती है। जबकि दोपहिया वाहनों की मांग में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है।
वित्त वर्ष 2024 की दूसरी छमाही में आईटी कंपनियों की ग्रोथ सपाट रहने की उम्मीद
आईटी कंपनियों के अब तक आए नतीजों पर बात करते हुए अनिल रेगो ने कहा कि अब तक नतीजे जारी करने वाली लार्जकैप आईटी कंपनियों ने अपने गाइडेंस में आगे कमजोरी जारी रहने के संकेत दिए हैं। इसे देखते हुए लगता है कि वित्त वर्ष 2024 की दूसरी छमाही में आईटी कंपनियों की ग्रोथ सपाट रह सकती है या फिर इसमें मामूली बढ़त देखने को मिल सकती है।
अगले साल हो सकती है ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत
मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में अनिल ने आगे कहा कि यूएस फेड ने अपनी पिछली बैठक में साल के अंत से पहले दरों में संभावित बढ़ोतरी का संकेत दिया था। भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए फेड की तरफ दर में बढ़ोतरी या इसमें विराम कोई बड़ा प्रभावी फैक्टर नहीं होगा। क्योंकि बाजार ये मानकर चल रहा है कि अमेरिका और भारत दोनों ही अगले साल ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत करेंगे।
लंबी अवधि में भारत के एक्सपोर्ट कारोबार की संभावना काफी अच्छी
क्या आपको लगता है कि भारत-यूके एफटीए डील इस बार हो पाएगी? आप इससे क्या उम्मीद करते हैं? इसके जवाब में अनिल ने कहा कि भारत के वाणिज्य सचिव के मुताबिक भारत-यूके एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) संभवतः 2023 के अंत तक संपन्न हो जाएगा। भारत-यूके व्यापार समझौते पर बातचीत उन चरणों में है जहां बड़े मतभेदों को दूर किया जा रहा है। ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी लो सिंगल डिजिट में है। देश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। यह भारत का अब तक का सबसे जटिल एफटीए होगा। लंबी अवधि में भारत के एक्सपोर्ट कारोबार की संभावना काफी अच्छी दिख रही है। सरकार एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए कदम उठा रही है।
टायर सेक्टर पर न्यूट्रल नजरिया
टायर सेक्टर पर बात करते हुए अनिल ने कहा कि ऑपरेटिंग लीवरेज और कच्चे माल की लागत में गिरावट के कारण टायर कंपनियों मार्जिन में विस्तार की उम्मीद है। साथ ही इनके रेवेन्यू में भी मिड सिंगल डिजिट ग्रोथ देखने को मिल सकती है। ट्रक, बस और रेडियल टायरों की मांग में मजबूती है। लेकिन टायरों की रिप्लेसमेंट मांग में मंदी है। इस सेक्टर के लिए अनिल का नजरिया न्यूट्रल है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।