Zee Entertainment के पुनीत गोयनका, सुभाष चंद्रा के खिलाफ सेबी का बड़ा एक्शन, एक साल तक सिक्योरिटीज मार्केट में नहीं कर सकेंगे ट्रांजेक्शन

यह पूरा मामला कॉर्पोरेट एप्रूवल के बगैर एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के लिए लोन जुटाने के वास्ते हैदराबाद की प्रॉपर्टी को गिरवी रखने से जुड़ा है। ZEEL के ऑडिटर्स के यह बताने के बाद मामला खुला कि कुछ अचल संपत्तियों के टाइटल डीड गायब हैं। ऑडिटर्स ने FY2018-19 की ऑडिट रिपोर्ट में यह बताया था

अपडेटेड Aug 01, 2026 पर 1:02 PM
सुभाष चंद्रा जी एंटरटेनमेंट के मानद चेयरमैन हैं, जबकि पुनीत गोयनका सीईओ हैं।

सेबी ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज, पुनीत गोयनका और एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। तीनों तय समय तक सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे। सेबी ने पाया है कि कॉर्पोरेट एप्रूवल के बगैर एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के लिए लोन जुटाने के वास्ते हैदराबाद की प्रॉपर्टी को कंपनी ने गिरवी रखा। सुभाष चंद्रा जी एंटरटेनमेंट के मानद चेयरमैन हैं, जबकि पुनीत गोयनका सीईओ हैं।

पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा  पर 12 महीने तक रहेगी रोक

SEBI ने इस मामले में जारी अपने ऑर्डर में कहा है कि Zee Entertainment Enterprises (ZEEL) पर सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रांजेक्शन पर 2 महीने तक रोक रहेगी। लेकिन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा 12 महीने तक सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे। रेगुलेटर ने तीनों पर कुल 1.48 करोड़ की पेनाल्टी भी लगाई है। ZEEL पर 30 लाख, गोयनका पर 58 लाख और चंद्रा पर 60 रुपये की पेनाल्टी लगाई गई है।


ZEEL के ऑडिटर्स ने टाइटल डीड गायब होने का खुलासा किया

यह पूरा मामला ZEEL के ऑडिटर्स के यह बताने के बाद खुला कि कुछ अचल संपत्तियों के टाइटल डीड गायब हैं। ऑडिटर्स ने FY2018-19 की ऑडिट रिपोर्ट में यह बताया था। इसके बाद सेबी ने मामले की जांच की। उसने यह जांच की कि क्या कंपनी ने सेबी लिस्टिंग रेगुलेशंस और PFUTP रेगुलेशंस का उल्लंघन किया है।

चार कंपनियों ने इंडियाबुल्स से लिए थे 726 करोड़ रुपये कर्ज

सेबी के ऑर्डर के मुताबिक, Essel Group की चार कंपनियों-Gnex Projects Pvt Ltd, Vivek Infracon Pvt Ltd, Gnex Infrabuild और Renu Realtech ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस (IHFL) से दिसंबर 2016 में 726 करोड़ रुपये कर्ज लिए थे। इसमें Essel Home Pvt Ltd को-बॉरोअर थी। सेबी ने कहा है कि जांच में पाया गया कि कर्ज लेने वाली कंपनियों की ओनरशिप कई तरह के कॉर्पोरेट लेयर्स क जरिए प्रमोटर फैमिली से जुड़ी थी।

कंपनी ने हैदराबाद की प्रॉपर्टी की ऑरिजिनल टाइटल डीड डिपॉजिट किया

सेबी ने पाया कि सिक्योरिटी कवर मेंटेन करने में नाकाम रहने पर IHFL ने एडिशनल कोलैटरल के लिए नवंबर 2018 में नोटिस इश्यू किया। सेबी के ऑर्डर में कहा गया है कि 27 दिसंबर, 2018 को ZEEL की तरफ से एक डिक्लेरेशन और एकनॉलजमेंट दिया गया। इसमें हैदराबाद स्थित कंपनी की प्रॉपर्टी की ऑरिजिनल टाइटल डीड लोन के अतिरिक्त सिक्योरिटी के रूप में IHFL के पास डिपॉजिट किया गया।

हैदराबाद की प्रॉपर्टी को मॉर्टगेज रखने के लिए तय नियमों का पालन नहीं किया गया

रेगुलेटर ने कहा कि डिक्लेरेशन में बताया गया कि ZEEL ने इस मॉर्टगेज (हैदराबाद की प्रॉपर्टी) के लिए सभी जरूरी एप्रूवल हासिल किए थे। लेकिन, सेबी की जांच में यह पाया गया कि इसके लिए कंपनी की ऑडिट कमेटी, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या शेयरहोल्डर्स के एप्रूवल नहीं लिए गए थे। सेबी ने यह भी पाया कि ZEEL ने बाद में बताया कि कंपनी के मैनेजमेंट और पोर्ड को मॉर्टगेज की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कभी इसकी मंजूरी नहीं दी थी।

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