Expert Columns : एमके इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के कश्यप जावेरी डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन और एआई थीम पर काफी बुलिश हैं। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी पर होने वाला ग्लोबल खर्च 2030 तक रेवेन्यू के 5 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है (आज के 3 फीसदी के मुकाबले) और इसमें से 50-60 फीसदी खर्च डिजिटलीकरण और ऑटोमेशन पर किया जाएगा।
कंपनी और क्षेत्र सेक्टर रिसर्च में एक दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले फंड मैनेजर और रिसर्च हेड ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के साथ, रियल एस्टेट सेक्टर में पाइपिंग, सिरेमिक, प्लाईवुड और कुछ दूसरे बिल्डिंग मटेरियल के जरिए से भी हो सकता है। BFSI विश्लेषक कश्यप के मुताबिक कम ब्याज दरों के माहौल में आमतौर पर एनबीएफसी, रियल एस्टेट और भारी कर्ज वाली कंपनियों जैसे सेक्टरों को फायदा होता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूत वापसी की उम्मीद
कश्यप जावेरी का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़े कमाई के मामले में कमजोर रहे हैं (निफ्टी 50 EBIDTA और PAT में 5 फीसदी और 4 फीसदी की बढ़त)। यह तिमाही चुनावों (लगभग 2 महीने लंबे) और गर्मी की लहर से भी प्रभावित रही। कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश के कारण जुलाई-सितंबर तिमाही के आंकड़े भी प्रभावित होंगे। हालांकि, 5-6 फीसदी सरप्लस मानसून और मजबूत खरीफ बुवाई की वजह इस साल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूत वापसी की उम्मीद की जा सकती है।
क्या आपको लगता है कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती तभी करेगा जब महंगाई 4 फीसदी से नीचे रहेगी या विकास दर 6 फीसदी से नीचे गिरेगी? इसके जवाब में कश्यप जावेरी ने कहा कि पहले आरबीआई मौद्रिक नीति में किसी भी तरह की नरमी के मूड में नहीं था। लेकिन अब दरों में कटौती विचार का मुद्दा हो सकती है। पिछली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में, दो डिप्टी गवर्नर दरों में कटौती के पक्ष थे। ईएमई (उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं) की मौद्रिक नीतियां हमेशा पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं होती हैं। ये कहीं न कहीं यूएस फेड द्वारा उठाए गए कदमों पर निर्भर करती हैं। अब जबकि फेड ने दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है और इस साल ही दरों में और कटौती का रास्ता खोल दिया है, अब आरबीआई के पास भी कटौती की गुंजाइश है।
क्या आपकी पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट स्पेस को शामिल करने की सलाह है?
इसका जवाब देते हुए कश्यप जावेरी ने बताया कि इस समय उनकी रणनीतियों में रियल एस्टेट स्टॉक्स में सीधा निवेश नहीं है। हालांकि, अगर ब्याज दरों में कटौती का चक्र अनुकूल हो जाता है और आर्थिक विकास में मजबूती बना रहती है तो घरों पर होने वाला खर्च बढ़ेगा। रियल एस्टेट सेक्टर में पाइपिंग, सिरेमिक, प्लाईवुड और कुछ दूसरे बिल्डिंग मटेरियल के जरिए से भी हो सकता है।
क्या आपने ब्याज दरों में कटौती के साथ अपनी निवेश रणनीति बदली है?
कश्यप जावेरी ने बताया कि वे आमतौर पर ऐसे पोर्टफोलियो बनाने की कोशिश करते हैं जो दरों के बढ़ने-घटने से स्वतंत्र हों, जिसमें ऐसी कंपनियां शामिल हों जो कम कर्ज वाली हों या नकदी से भरपूर हों और जहां मांग पैसे की आपूर्ति से स्वतंत्र हो। हालांकि, कम दरों के दौर में आमतौर पर NBFC, रियल एस्टेट और भारी कर्ज वाली कंपनियों जैसे सेक्टरों को फायदा होता है।
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