Daily Voice : ग्लोबल AI थीम से जुड़े शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर रहें सतर्क, अगले 6-9 महीनों में मार्केट के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की संभावना कम
Daily Voice : ग्लोबल AI थीम के स्ट्रक्चरल पहलू को लेकर सकारात्मक नजरिया है लेकिन वैल्यूएशन को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार के एक दायरे में रहने की संभावना है,लेकिन अगले 6-9 महीनों में इसके रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने की उम्मीद कम है
Daily Voice : बाजार के लिए कई चुनौतियां हैं। इनमें से पहली है,वैल्यूएशन। मार्केट में अभी भी अभी भी कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं सब कुछ एकदम सही तरीके से होगा। ऐसे में अगर अर्निंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही,तो नुकसान से बचने की गुंजाइश बहुत कम होगी
Daily Voice :INVasset PMS के पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि नैस्डैक कंपोजिट में हालिया गिरावट महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन में आया बदलाव है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। वह इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव हैं,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधान हैं। उनका मानना है कि पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इनका रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।
उनके मानना है कि बाजार के नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग का स्तर वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस दौरान इनमें से किसी की भी गारंटी नहीं है। इसलिए,अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास शेयरों पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर अर्निंग अच्छी रहती है,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है।
क्या आपको लगता है कि ग्लोबल AI स्टॉक्स में अभी भी काफी बढ़त की गुंजाइश है,या आप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में हालिया गिरावट को लेकर चिंतित हैं?
ग्लोबल AI में आसानी से मिलने वाले फायदे का ज्यादातर हिस्सा पहले ही हासिल किया जा चुका है। हाल की गिरावट (जिसमें सेमीकंडक्टर सेक्टर की वैल्यूएशन में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की कमी आई और नैस्डैक में एक ही सेशन में जबरदस्त गिरावट देखी गई) असल में महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन का रीसेट है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव नजरिया है,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधानी की जरूरत है। पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इस सेक्टर का रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।
क्या निवेशकों को IT सर्विस कंपनियों और AI इकोसिस्टम में निवेश करने में जल्दबाजी से बचना चाहिए?
हैं, धैर्य रखना सही रहेगा,लेकिन यह धैर्य भी हकीकत पर आधारित होना चाहिए। भारतीय IT सर्विस कंपनियां AI साइकिल के एक मुश्किल दौर में हैं। AI से जुड़ी मांग बढ़ने और उसकी जगह लेने से पहले ही ऑटोमेशन की वजह से हर प्रोजेक्ट से होने वाली कमाई कम हो जाती है। बड़ी कंपनियों के लिए FY27 का कमजोर गाइडेंस (यानी 'कांस्टेंट-करेंसी'के आधार पर कम सिंगल-डिजिट ग्रोथ) इसी बात को दिखाता है।
टेक्नोलॉजी कंपनियों को डील मिलने की रफ़्तार अच्छी बनी हुई है,लेकिन कीमतों का दबाव और प्रोडक्टिविटी में कमी की वजह से निकट भविष्य में अर्निंग्स की रफ़्तार सीमित रह सकती है। ऐसे में मजबूत कंपनियों में निवेश बनाए रखेंगे,लेकिन रिटर्न की उम्मीदों को कम रखने की सलाह होगी। यह सेक्टर ऐसा है जिसका साइकल बदल रहा है। ऐसे में अभी इसमें सोच समझकर निवेश बनाए रखना चाहिए और बहुत ज्यादा निवेश करने से बचाना चाहिए।
क्या आपको उम्मीद है कि अगले 6-9 महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे?
ऐसा हो सकता है,लेकिन हमें इसे 'बेस केस'(सबसे ज्यादा संभावित स्थिति) नहीं मानना चाहिए। निफ्टी अभी भी अपने पीक (उच्चतम स्तर)से काफी नीचे 24,000 के आसपास है और मोमेंटम इंडिकेटर पक्के भरोसे के बजाय दुविधा की ओर इशारा कर रहे हैं। नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग,वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस समय इसकी कोई गारंटी नहीं है।
अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास स्टॉक्स पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर कंपनियों की अर्निंग अच्छी रही,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है। हम रिकॉर्ड स्तर तक तेजी से पहुँचने की उम्मीद करने के बजाय,इस धीरे-धीरे होने वाले सुधार के हिसाब से अपनी रणनीति बनाएंगे।
US-Iran के बीच संभावित डील से जुड़ी गतिविधियों के अलावा,आपको आगे चलकर मार्केट के लिए कौन सी बड़ी चुनौतियां दिखती हैं?
बाजार के लिए कई चुनौतियां हैं। इनमें से पहली है, वैल्यूएशन। मार्केट में अभी भी अभी भी कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं सब कुछ एकदम सही तरीके से होगा। ऐसे में अगर अर्निंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही,तो नुकसान से बचने की गुंजाइश बहुत कम होगी। दूसरी,चुनौती बड़ी ग्लोबल टेक और AI सेक्टर में करेक्शन है। अगर विदेशी बाजारों में वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आती है,तो विदेशी पैसा इमर्जिंग मार्केट (जिनमें भारत भी शामिल है) से बाहर निकल जाएगा। तीसरी चुनौती US में ब्याज दरों में कटौती की रफ्तार और डॉलर की मजबूती को लेकर अभी भी बनी अनिश्चितता है,जिसका सीधा असर FIIs पर पड़ता है।
चौथी चुनौती घरेलू अर्निंग की मजबूती है जहां मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ट्रेड पॉलिसी को लेकर भी चिंता बनी हुई है। भारत और अमेरिका के बीच कैसा समझौता होगा,इसको लेकर स्थितियां साफ नहीं हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बाजार में सावधानी बरतने की सलाह होगी।
क्या आपको लगता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में लंबे समय के लिए स्ट्रक्चरल निवेश के अच्छे मौके हैं?
ये स्ट्रक्चरल मौके तो हैं,लेकिन मैं इन्हें'सबसे अच्छे'कहने से बचने की जरूरत है। कई भारतीय प्लेटफॉर्म्स में मज़बूत नेटवर्क इफेक्ट और आगे बढ़ने की अच्छी गुंजाइश है,फिर भी कई प्लेटफॉर्म बहुत ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। इस वैल्यूएशन में यह मान लिया जाता है कि इनका काम बिना किसी गलती के होगा,जबकि इनके लिए मुनाफा,रेगुलेशन और कड़ी प्रतिस्पर्धा असल जोखिम बने हुए हैं।
हम उन्हें एक बड़े स्ट्रक्चरल बास्केट के हिस्से के तौर पर देखते हैं,जिसमें मैन्युफैक्चरिंग,बचत का फाइनेंशियलाइज़ेशन और प्रीमियम कंजम्पशन भी शामिल हैं । ये ऐसे थीम हैं जिनकी कमाई की संभावना आज ज्यादा साफ है। लेबल से ज्यादा जरूरी है सही चुनाव करना। हम उन कुछ ऐसे प्लेटफ़ॉर्म में निवेश करेंगे जो साफ तौर पर मुनाफ़ा कमा रहे हैं और ग्रोथ के लिए किसी भी कीमत पर निवेश करने से बच रहे हैं।
डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।