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Daily Voice: आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के हरीश कृष्णन को ये तीन सेक्टर नजर आ रहे छुपे रुस्तम

हरीश कृष्णन का मानना है कि ये तीनों सेक्टर लॉन्ग टर्म में जोरदार वेल्थ क्रिएशन कर सकते हैं। इन प्रदर्शन अब तक कमजोर रहा है। लेकिन इनके तेजी पकड़ने की बारी है। इसके अलावा इन सेक्टरो में अंडर ओनरशिप के कारण इनमें बेहतर सेफ्टी मार्जिन नजर आ रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 10, 2024 पर 10:31 AM
Daily Voice: आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के हरीश कृष्णन को ये तीन सेक्टर नजर आ रहे छुपे रुस्तम
हरीश कृष्णन ने कहा कि देश में शहरी खपत में कमी आ रही है। हाल ही में जीएसटी कलेक्शन में देखने को मिली सुस्त बढ़त से इस बात की पुष्टि होती है। हालांकि, हमें लगता है कि ये क्षणिक मंदी है

हरीश कृष्णन आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी में Co-CIO और इक्विटी हेड हैं। हरीश कृष्णन का कहना है कि मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और सीमेंट सेक्टर आगे छुपे रुस्तम साबित हो सकते हैं। ये सेक्टर लंबी अवधि से चल रहे खराब प्रदर्शन और उम्मीद से कम ओनरशिप को देखते हुए ज्यादा सेफ्टी मार्जिन प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा, उनके मुताबिक आईटी, फार्मा, कैपिटल गुड्स, ऑटो और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में तेजी बनी रहेगी। उनका मानना है कि इन सेक्टरों में आने वाली कोई बड़ी गिरावट हमें और खरीदारी के अवसर प्रदान करेगी।

लगभग 20 वर्षों के अनुभव (कोटक म्यूचुअल फंड में 10 वर्षों सहित) वाले हरीश का मानना ​​है कि भारतीय कंपनियों की आय में मंदी और निकट भविष्य में आय में सुस्ती, तथा इसके विपरीत उच्च मूल्यांकन और उच्च उम्मीदें निकट भविष्य में भारत के लिए बड़े जोखिम हैं।

असेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में लगभग 20 वर्षों के अनुभव (कोटक म्यूचुअल फंड में 10 वर्षों सहित) वाले हरीश का मानना ​​है कि भारतीय कंपनियों की आय में सुस्ती, महंगा वैल्यूएशन और बाजार से ज्यादा की उम्मीद निकट भविष्य में भारतीय बाजारों के लिए बड़े जोखिम हैं।

आरबीआई पॉलिसी पर बात करते हुए हरीश कृष्णन ने कहा कि आरबीआई द्वारा "तटस्थ" रुख में किया गया बदलाव उत्साहजनक है। इसका मतलब ये है कि जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए कदम उठा सकता है। हरीश कृष्णन का मानना ​​है कि आरबीआई आंकड़ों पर निर्भर करेगा। उसकी नजर विकसित देशों के केंद्रीय बैंक के एक्शन और भारत में महंगाई के रुझान पर रहेगी। उनको लगता है कि रुख में इस बदलाव से दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बन रही है।

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