Daily Voice: लिक्विडिटी तय करेगी बाजार की दिशा, कमजोर मानसून ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर शेयरों पर डालेगा खराब असर

अंशुल सहगल का मानना है कि बाजार की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका लिक्विडिटी की ही होगी। उनका कहना है कि अगर आरबीआई अपने कड़े रुख में नरमी लाता (ब्याज दरों में कटौती करता है) है तो इक्विटी बाजारों में आर्थिक परिस्थितियों सुधार की आशा में तेजी आती दिखेगी। इस समय फाइनेंशियल, इंडिस्ट्रियल, फार्मास्युटिकल, कंज्यूमर ड्यूरेबल, कमोडिटी और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कुछ ऐसे सेगमेंट है जिसमें वैल्यू बाइंग के मौके नजर आ रहे हैं

अपडेटेड Apr 20, 2023 पर 4:06 PM
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अंशुल का मानना है कि नई तेजी पकड़ने के पहले आईटी सेक्टर में अभी और कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है

Daily Voice: भविष्य में अच्छा रिटर्न हासिल करने के लिए इस समय पोर्टफोलियो बनाने का अच्छा समय नजर आ रहा है। पिछले 18 महीनों में बाजार ने कुछ खास नहीं किया है। कुछ सेगमेंट में तो काफी डी-रेटिंग देखने को मिली है। चूंकि देश की ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। ऐसे में बाजार में इस समय निवेश के काफी अच्छे मौके दिख रहे हैं। ये बातें मनीकंट्रोल के साथ हुए एक बातचीत में कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी अंशुल सहगल ने कही हैं। कैपिटल मार्केट का 16 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले अंशुल का मानना है कि अगर मॉनसून कमजोर रहता है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है।

अंशुल सहगल का मानना है कि बाजार की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका लिक्विडिटी की ही होगी। उनका कहना है कि अगर आरबीआई अपने कड़े रुख में नरमी लाता (ब्याज दरों में कटौती करता है) है तो इक्विटी बाजारों में आर्थिक परिस्थितियों सुधार की आशा में तेजी आती दिखेगी।

अंशुल सहगल का मानना है कि इस समय फाइनेंशियल, इंडिस्ट्रियल, फार्मास्युटिकल, कंज्यूमर ड्यूरेबल, कमोडिटी और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कुछ ऐसे सेगमेंट है जिसमें वैल्यू बाइंग के मौके नजर आ रहे हैं।


क्या आपको लगता है कि अलनीनो बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती होगा?

इस सवाल का जवाब देते हुए अंशुल ने कहा कि 2000 के बाद हमको 2002–03, 2004–05, 2006–07, 2009–10, 2014–16 and 2018–19 में अलनीनो का सामना करना पड़ा है। इस दौरान 2006-07 को छोड़कर और सभी अलनीनो वाले वर्षों में कम बारिश हुई है। अलनीनो वाले वर्षों में हमको फूड प्रोडक्शन पर कमी देखने को मिली है। ऐसे में अगर इस साल भी अलनीनो के चलते मानसून कमजोर रहता है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। जिसके चलते टू व्हीलर, ट्रैक्टर, कंज्यूमर स्टेपल सेगमेंट में कमजोरी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर पुराने अनुभव के आधार पर देखें तो कुल मिलाकर बाजार पर अलनीनो का बहुत कम असर देखने को मिलेगा है।

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क्या यह टेक्नोलॉजी स्टॉक में निवेश करने का सही समय है?

इस सवाल का जवाब देते हुए अंशुल ने कहा कि अब तक आए करेक्श के बावजूद आईटी स्टॉक अभी भी अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन से महंगे हैं। हालांकि इस सेक्टर के कुछ स्टॉक्स का वैल्यूएशन अच्छा लग रहा है। अंशुल का मानना है कि नई तेजी पकड़ने के पहले आईटी सेक्टर में अभी और कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।

क्या आपको लगता है कि यूएस फेड मई में ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विराम लगा सकता है?

इस सवाल के जावाब में अंशुल ने कहा कि भारत में एक कहावत है कि हाथी निकल गया, बस पूंछ रह गई। यह बात यूएस फेड के ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चक्र पर भी लागू होती है। हालांकि ब्याज दरों में यूएस फेड की तरफ से अभी कुछ और बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन यह पिछले 12-15 महीनों में हुई बढ़त की तुलना में काफी कम होगी। इस माहौल में रेट हाइक पर अपना ध्यान न लगाकर ऐसे स्टॉक्स पर फोकस करना चाहिए जो अब काफी सस्ते में मिल रहे हैं और जिनकी अर्निंग पावर और भविष्य का ग्रोथ आउटलुक काफी अच्छा नजर आ रहा है।

 

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