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Daily Voice: मार्सेलस के को-फाउंडर ने कहा, ऑटोमेशन छीन रहा रोजगार, कमजोर अर्निंग से भारत की विकास संभावनाओं पर पड़ रहा असर

Daily Voice: भारत की मूलभूत शक्तियों में से एक उसका डेमोग्रॉफिक डिविडेंड है। यानी लाखों युवा देश के वर्कफोर्स में शामिल होकर आर्थिक विकास में योगदान दे रहे हैं। प्रमोद गुब्बी ने कहा कि अगर सरकार रोजगार देने में असमर्थ है रहती है तो उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ करना मुश्किल होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 28, 2024 पर 10:43 AM
Daily Voice: मार्सेलस के को-फाउंडर ने कहा, ऑटोमेशन छीन रहा रोजगार, कमजोर अर्निंग से भारत की विकास संभावनाओं पर पड़ रहा असर
प्रमोद का कहना है कि वैल्युएशन के नजरिए से केवल निजी क्षेत्र के बैंक ही निवेश के लिए अच्छे नजर आ रहे हैं

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के को-फाउंडर प्रमोद गुब्बी ने मनीकंट्रोल को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत की विकास गाथा के लिए सबसे बड़ा जोखिम मैन्युफैक्चरिंग, सविर्स और कृषि सहित सभी सेक्टरों में ऑटोमेशन की तेज बढ़त है जो रोजगार सृजन में बाधा डालती है। दूसरी तिमाही के नतीजों में सुस्ती के बाद, गुब्बी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के नतीजों पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा विकास कार्यों पर किए जाने वाले खर्च में गिरावट के चलते हाल के वर्षों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कई सेक्टरों के ऑर्डर बुक और आय में दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा उपभोग स्तर में गिरावट से निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में सुधार के शुरुआती संकेतों को खतरे में डाल सकता है।गुब्बी ने कहा कि वर्तमान में केवल प्राइवेट बैंकों के वैल्यूएशन ही निवेश के नजरिए से अच्छे लग रहे हैं।

क्या आपको भारत की विकास गाथा में कोई बड़ा जोखिम नज़र आता है?

इसके जवाब में प्रमोद गुब्बी ने कहा कि भारत की विकास की कहानी में सबसे बड़ा जोखिम उद्योगों में बढ़ता ऑटोमेशन है। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और यहां तक ​​कि कृषि में भी ऑटोमेशन बढ़ रहा है। जिसके परिणामस्वरूप रोजगार सृजन में कमी आ रही है। भारत की मूलभूत शक्तियों में से एक उसका डेमोग्रॉफिक डिविडेंड है। यानी लाखों युवा देश के वर्कफोर्स में शामिल होकर आर्थिक विकास में योगदान दे रहे हैं। प्रमोद गुब्बी ने कहा कि अगर सरकार रोजगार देने में असमर्थ है रहती है तो उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ करना मुश्किल होगा। वास्तव में, इसके लिए जनकल्याणकारी व्यय में बढ़त की भी जरूरत हो सकती है। इसका राजकोषीय स्थिति या विकास के लिए सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बनाने की हमारी क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है।

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