Equirus Securities एक्सपोर्ट आधारित सेक्टर को लेकर सतर्क है। ग्लोबल बाजार में मंदी के दबाव के चलते एक्सपोर्ट आधारित सेक्टरों पर दबाव बनने की संभावना है। हालांकि एक्सपोर्ट पर आधारित उन कंपनियों को लेकर हम बुलिश हैं, जिनको चाइन प्लस वन पॉलिसी का फायदा होगा। ये बातें Equirus Securities के मैनेजिंग डायरेक्टर रिसर्च आशुतोष तिवारी ने मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में कही हैं। तिवारी ने आगे कहा कि अच्छे मानसून के बाद ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली मांग में सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के बढ़ते खर्च को देखते हुए आगे घरेलू मांग की मजूबती बने रहने की संभावना है।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले महीने से दुनिया भर के बाजार अपने निचले स्तरों से तेजी दिखाते नजर आ रहे हैं। महंगाई के मोर्चे पर मिली राहत से बाजार एक बार फिर तेजी के मूड में आ रहे हैं। लेकिन ग्लोबल नजरिए से देखें तो अभी भी हम मुश्किलों के दौर से बाहर नहीं हैं। बढ़ती ब्याज दरें और मंद पड़ती इकोनॉमी का डर अभी भी कायम है।
आशुतोष तिवारी को निवेश के नजरिए से इस समय ऑटो, सीमेंट रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े स्टॉक अच्छे नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि ऑटो सेक्टर इस समय 3 साल के मंदी के चक्र से बाहर आते नजर आ रहे हैं। अब अगले 3 साल इनमें तेजी रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि आगे हमें कमोडिटी की कीमतों में गिरावट के साथ ही ऑटो सेक्टर की मार्जिन और अर्निंग ग्रोथ में सुधार आता नजर आएगा।
बाजार के आउटलुक पर बात करते हुए तिवारी ने कहा कि आगे मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सेक्टर में हमें तेजी आने की संभावना है। सरकार इन्फ्रा पर अपना फोकस बढ़ा रही है। जिसका फायदा आगे इंडस्ट्रियल कैपिटल गुड्स , रियल एस्टेट, बिल्डिंग मैटेरियल जैसे सेक्टर्स को मिलेगा। इन्फ्रा पर फोकस के चलते सीमेंट कंपनियों को फायदा होगा। ऐसे में इस समय हमें ऑटो सीमेंट, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में कमाई के अच्छे मौके नजर आ रहे हैं। कुछ ऐसी मिड और स्माल कैप कंपनियां इस समय निवेश के नजरिए से काफी अच्छी नजर आ रही हैं जिनके मार्जिन पर कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते दबाव आया था। लेकिन अब कमोडिटी के भाव घटते ही इनमें जोरादर तेजी की संभावना है।
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